'वाटरगेट के काग़ज़ात सार्वजनिक हों'

रिचर्ड निक्सन(फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption रिचर्ड निक्सन अमरीकी इतिहास में कार्यकाल के दौरान इस्तीफ़ा देने वाले अकेले राष्ट्रपति हैं.

अमरीका में एक संघीय जज के आदेश पर पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन का वाटरगेट स्कैंडल मामले में ख़ुफ़िया ग्रैंड ज्यूरी के सामने दिया गया बयान 36 साल बाद सार्वजनिक किया जा रहा है.

जज रॉयस लैंबर्थ ने इस दस्तावेज़ को सार्वजनिक करने का आदेश एक इतिहासकार स्टैनले कटलर की अपील पर दिया है.

इतिहासकार कटलर का कहना था कि पूर्व राष्ट्रपति निक्सन का ज्यूरी को दिया गया बयान ऐतिहासिक महत्व रखता है लिहाज़ा उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

लेकिन अदालत के आदेश के अनुसार इस दस्तावेज़ की सील उस वक़्त तक नहीं तोड़ी जाएगी जब तक इस मामले में सरकार के पास उस आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने का अधिकार है.

वाटरगेट स्कैंडल की वजह से तत्कालीन राष्ट्रपित रिचर्ड निक्सन को 1974 में इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

वो अपने कार्यकाल के दौरान इस्तीफ़ा देने वाले अकेले अमरीकी राष्ट्रपति हैं.

'वाटरगेट'

वाशिंगटन स्थित डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के मुख्यालय में हुई एक चोरी के बाद उठे बवाल के कारण उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

निक्सन ने अपने इस्तीफ़े के दस महीने के बाद जून 1975 में कैलिफ़ॉरनिया में दो दिनों तक अपना बयान दर्ज करवाया था.

Image caption इसी इमारत में डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी का दफ़्तर था जहां चोरी हुई थी.

इस मामले में अब अमरीकी जज लैंबर्थ का कहना है कि 297 पन्नों पर आधारित उस दस्तावेज़ की ऐतिहासिक अहमियत, उसे राज़ रखने की ज़रूरत की तुलना में ज़्यादा है.

जज लैंबर्थ का कहना था, ''राष्ट्रपति निक्सन के बयान को सार्वजनिक करने से मौजूदा ऐतिहासिक रिकॉर्ड को और शक्ति मिलेगी, इससे विद्वानों के बीच विचार विमर्श को बढ़ावा मिलेगा और एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना के बारे में लोगों की समझ और बेहतर होगी.''

विस्कॉनसिन विश्वविधालय के अध्यापक और इतिहासकार स्टैनले कटलर ने निक्सन और वाटरगेट स्कैंडल के बारे में कई किताबें लिखी हैं और इससे पहले उन्होंने सरकार को सफलतापूर्वक इस बात के लिए मजबूर किया था कि वो ओवल ऑफ़िस में राष्ट्रपति निक्सन के ज़रिए ख़ुफ़िया तौर पर किए गए ऑडियो रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक करे.

कटलर ने कहा, ''निक्सन ये बात जानते थे कि जब वे ज्यूरी के सामने अपना बयान दर्ज करा रहें है तो उन पर शपथ भंग करने के आरोप लगने का ख़तरा था, इसलिए मैं शर्त लगाता हूं कि उन्होनें सच्चा बयान दिया था. लेकिन उन्होंने क्या बयान दिया ये मैं नहीं जानता.''

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