नहीं निकाली जाएँगी आँखें

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ईरान में सरकारी टीवी के मुताबिक अमीना बहरामी नाम की युवती ने उस ईरानी व्यक्ति को माफ़ कर दिया है जिसने उस पर तेज़ाब फ़ेंका था. बदले में माजिद नाम के पुरुष को अंधा कर दिए जाने की सज़ा सुनाई गई थी.

अमीना ने माँग की थी कि शरिया क़ानून के तहत तेज़ाब फ़ेंकने वाले को सज़ा दी जाए. अदालत ने ईरानी लड़की की माँग को स्वीकार किया था कि माजिद की आँखें निकाल दी जाएँ.

ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि अमीना ने आख़िरी क्षणों में फ़ैसला किया कि वो सज़ा देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर रही है.

वर्ष 2004 में माजिद ने अमीना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था जिसे उसने ठुकरा दिया था. इसके बाद माजिद ने तेज़ाब से हमला कर अमीना का चेहरा बुरी तरह ख़राब कर दिया था.

मानवाधिकार गुट एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंधे किए जाने की सज़ा का विरोध किया था और कहा था कि ये अमानवीय है.

सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक अमीना ने कहा है, “मैं इस फ़ैसले को लेकर सात सालों से जद्दोजहद कर रही हूँ. आज मैने उसे माफ़ कर दिया है क्योंकि ये मेरा हक़ है. मैने ये अपने देश के लिए किया क्योंकि बाकी सब देशों की निगाह इस पर थी हम क्या कदम उठाते हैं. बदला लेना मेरा मकसद नहीं था. मैं सिर्फ़ चाहती थी कि ये सज़ा सुनाई जाए. लेकिन मैं कभी उसे लागू नहीं करती. उसकी आँखें छीनने की मंशा मेरी कभी नहीं थी.”

सरकारी वकील ने कहा है कि अमीना को मजीद के परिवार से हर्जाने के रूप में पैसे नहीं मिले. अमीना के मुताबिक वो सिर्फ़ चिकित्सा पर हुआ खर्चा चाहती थी जिसे वो दो लाख 16 हज़ार डॉलर बता रही हैं.

अमीना का कहना है, “मजीद को 10-12 साल की सज़ा हुई है जिसमें से उसने केवल सात साल की सज़ा काटी है. जब तक पूरा मुआवाज़ नहीं दिया जाता, वो रिहा नहीं होगा.” वहीं अमीना की माँ ने कहा है कि उसे अपनी बेटी पर फ़क्र है कि उसमें मजीद को माफ़ करने की हिम्मत है.

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