इतिहास के पन्नों से

इतिहास में एक अगस्त की तारीख़ कई महत्वपूर्ण घटनाओं के नाम दर्ज़ है. इसी दिन वारसॉ को जर्मनी के कब्ज़े से छुड़ाने की लड़ाई शुरू हुई थी और ब्रिटेन के एक पुस्तकालय में भयंकर आग लगी थी.

1944: वारसॉ की मुक्ति के लिए लड़ाई की शुरुआत

Image caption पोलैंड के कई विद्रोहियों ने हाथों में लाल और सफ़ेद रंग के पट्टे पहन रखे थे.

पोलैंड की सेना ने वारसॉ को आज़ाद कराने की लड़ाई एक अगस्त 1944 को ही शुरू की थी.

द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरू होने पर वारसॉ पहली यूरोपीय राजधानी थी जिसपर पांच साल पहले जर्मनी का कब्ज़ा हो गया था.

पोलैंड से मिली रिपोर्ट के मुताबिक़ लड़ाई के लिए इस समय का चुनाव काफ़ी सोच-समझकर किया गया था क्योंकि जर्मनी युद्ध में अपनी स्थितियों की वजह से वारसॉ पर अपना नियंत्रण छोड़ने के बारे में सोच रहा था.

रूस की लाल सेना के लगातार हमलों की वजह से जर्मनी को पिछले कुछ महीनों में बेलारूस और पश्चिमी पोलैंड से हटना पड़ा था.

पहले दिन की लड़ाई में ही वारसॉ के कई महत्वपूर्ण इलाक़ों पर पोलैंड का कब्ज़ा हो गया था और गैस, बिजली और जलापूर्ति सेवाएं पोलैंड के नियंत्रण में आ गई थीं.

एक अनुमान के मुकाबिक़ इस लड़ाई में पोलैंड के 2,000 और जर्मनी के 500 लोग मारे गए थे.

1994: पुस्तकालय में लगी आग में ऐतिहासिक दस्तावेज़ खाक़

Image caption सन् 1090 तक पुराने दस्तावेज़ पुस्तकालय में रखे गए थे.

एक अगस्त 1994 को ब्रिटेन के नॉर्विक सेंट्रल लाइब्रेरी में लगी भयंकर आग में हज़ारों ऐतिहासिक दस्तावेज़ और एक लाख से ज़्यादा किताबें जलकर खाक़ हो गई थीं.

शुरुआती जांच में पता चला कि पुस्तकालय में आग गैस धमाके से लगी थी.

पुस्तकालय के प्रभारी ने जैसे ही बिजली का स्विच ऑन किया धमाका हो गया हालांकि वो इसमें बाल-बाल बच गए थे.

किसी अन्य व्यक्ति को भी कोई चोट नहीं आई थी.

जो दस्तावेज़ जलकर खाक़ हुए थे उनमें 800 साल पुराना नॉर्विक शहर का चार्टर और वर्ष 1090 में लिखी पांडुलिपियां भी शामिल थीं.

अभिलेखकारों ने इन दस्तावेज़ों को बचाने की पूरी कोशिश की थी.

नॉर्विक सेंट्रल लाइब्रेरी का उद्घाटन साल 1963 में महारानी एलिज़ाबेथ ने किया था और इस पुस्तकालय के नवीकरण के लिए हाल ही में 380,000 पाउंड खर्च किए गए थे.

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