इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों पर नज़र डालें तो दो अगस्त के दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थी. इसी दिन 1990 में इराक़ ने अपने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला किया और उस पर क़ब्ज़ा कर लिया. इसी दिन इटली में एक ज़बर्दस्त धमाका हुआ था जिसमें कुल 85 लोग मारे गए थे.

1990: इराक़ का कुवैत पर हमला

Image caption कुवैत पर इराक़ी हमले के बाद ही पहला खाड़ी युद्घ हुआ था.

साल 1990 में आज ही के दिन सुबह- सुबह एक लाख से भी ज़्यादा इराक़ी सेना ने 700 टैंकों के साथ अपने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला कर दिया और कुछ ही देर मे उसपर क़ब्ज़ा कर लिया.

कुवैत के अमीर सऊदी अरब भाग गए थे. दुनिया भर में इराक़ी आक्रमण की निंदा हुई और नौ अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से कुवैत पर इराक़ी क़ब्ज़े को अवैध क़रार दिया.

उसके बाद अगले तीन महीनों तक अमरीका की निगरानी में गठबंधन सेना को खाड़ी में तैनात कर दिया गया लेकिन सोवियत संध ने कहा था कि वो किसी भी सैनिक कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा.

खाड़ी का संकट गहराता गया और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक़ को कुवैत से बलपूर्वक हटाने की तैयारी शुरू कर दी.

कुवैत से हटने के पश्चिमी देशों के ज़रिए तय किए गए सभी समयसीमा को इराक़ ने नज़रअंदाज़ कर दिया.

आख़िरकार 17 जनवरी, 1991 को गठबंधन सेना ने इराक़ के ख़िलाफ़ 'डेज़र्ट स्टॉर्म' नाम से सैनिक अभियान शुरू कर दिया.

इराक़ ने भी हमले का जवाब दिया और सऊदी अरब तथा इसराइल पर स्कड मिसाइल दाग़े. भीषण लड़ाई होती रही लेकिन आख़िरकार 28 फ़रवरी को इराक़ ने घुटने टेक दिए और युद्घ विराम के लिए तैयार हो गया.

1984: यूरो अदालत ने फ़ोन टैपिंग की आलोचना की

आज ही के दिन 1984 में यूरोप के मानवाधिकार अदालत ने एक अहम फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि एक ब्रिटिश नागरिक का फ़ोन टैप कर ब्रिटेन की सरकार ने यूरीपियन कंवेन्शन का उल्लंघन किया है.

दरअसल पूरा मामला ये था कि ब्रिटेन के एक व्यापारी जेम्स मलोन ने आरोप लगाया था कि 1977 में जब उसके ख़िलाफ़ चोरी का सामान ख़रीदने-बेचने का मुक़दमा चल रहा था उस दौरान पुलिस ने उनके फ़ोन टैप किए थे और उनके ख़तों को खोलकर देखा था.

साल 1979 में चोरी के सामान के मामले में बरी होने के बाद मलोन ने हाई कोर्ट में पुलिस के ख़िलाफ़ अपील की लेकिन अदालत ने कहा कि ये मामले उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

लेकिन छह साल के लगातार अभियान के बाद जेम्स मलोन के केस को साल 1983 में यूरोपीय अदालत में भेजा गया जहां एक साल बाद यानि साल 1984 में 18 जजों की बेंच ने फ़ैसला सुनाया कि ब्रिटेन सरकार ने जेम्स मलोन का फ़ोन टैप कर यूरोपिय कंवेन्शन का उल्लंघन किया है.

1980: इटली में बम धमाका, 85 की मौत

Image caption इटली के इतिहास में इसे सबसे ख़तरनाक चरमपंथी हमलों में शुमार किया जाता है.

आज ही के दिन 1980 में इटली के बोलोना रेलवे स्टेशन पर एक ज़बर्दस्त बम धमाका हुआ था जिसमें कुल 85 लोग मारे गए थे और 200 से ज़्यादा घायल हो गए थे.

धमाका रेलवे स्टेशन के वातानुकूलित प्रतीक्षालय में हुआ था जहां गर्मी से बचने के लिए ढेर सारे लोग मौजूद थे.

मारे जाने वालों में ज़्यादातर इटली के नागरिक थे लेकिन कुछ विदेशी नागरिक भी इस धमाके में मारे गए थे.

धमाके के तीन घंटे बाद एक नव-फ़ासीवादी संगठन ने रोम के एक अख़बार को फ़ोन कर धमाके की ज़िम्मेदारी ली लेकिन इसी तरह के दावे वामपंथी अतिवादी संगठनों ने भी की थी.

इटली के इतिहास में इसे सबसे ख़तरनाक चरमपंथी घटनाओं में से एक माना जाता है और इसे 'बोलोना नरसंहार' के नाम से जाना जाता है.

ये धमाका उसी दिन हुआ था जिस दिन इटली की एक अदालत ने मेरियो टूटी नाम के एक नव-फ़ासीवाद समेत आठ लोगों के खिलाफ़ छह साल पहले ट्रेन में हुए बम धमाके के लिए मुक़दमा चलाने का आदेश दिया था.

छह साल पहले चार अगस्त 1974 को रोम से ब्रेनेर जा रही रेल ट्रेन मे हुए बम धमाके में 12 लोग मारे गए थे.

बोलोना में हुए हमले के तीन दिन बाद इसके विरोध में देश व्यापी बंद का आह्वान किया गया था जिसमें सारा देश दो घंटे के लिए ठप पड़ गया था.

धमाके के बाद हफ़्तों तक कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया था लेकिन किसी के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा नहीं चला.

ज़्यादातर लोगों का मानना है कि ये हमला दक्षिणपंथी अतिवादियों के ज़रिए किया गया था ताकि इटली के साम्यवादियों के ख़िलाफ़ जन भावना को भड़काया जा सके.

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