अमरीका में ऋण संकट को लेकर समझौता

ओबामा
Image caption बराक ओबामा ने अमरीका के भारी वित्तीय संकट से उबरने की घोषणा की.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की है कि सत्ताधारी डेमोक्रेट और विपक्षी रिपब्लिकन दलों के बीच देश के क़र्ज़ लेने की सीमा को बढ़ाने को लेकर समझौता हो गया है ताकि अमरीका अपने ऋण की अदाएगी में चूक न जाए.

बराक ओबामा ने कहा कि समझौते के तहत अगले 10 सालों में सरकारी ख़र्चो में एक खरब डालर की कमी की जाएगी.

ओबामा ने एक समीति के गठन की भी घोषणा की जो ख़र्च में कटौती पर नवंबर तक एक रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.

लेकिन दोनों दलों के बीच हुए इस समझौते को संसद की मंज़ूरी मिलनी है. उम्मीद की जा रही है कि इसे सोमवार तक संसद के दोनों सदनों के सामने पेश किया जा सकता है.

अमरीका को दो अगस्त तक कर्ज़ लेने की अपनी 14 खरब डालर की सीमा को बढ़ाना था वरन् इस बात का डर था कि वो ऋण की अदाएगी में चूक जाएगा.

'घाटे में कमी की कोशिश'

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि हालांकि वो इस तरह का समझौता नहीं चाहते थे लेकिन इसके तहत सरकार के घाटे में कमी के लिए गंभीर कोशिश होगी.

सरकार के घाटे को कम करने को लेकर राष्ट्रपति बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक और विपक्षी रिपब्लिकन पार्टियों में भारी मतभेद हैं. इसी कारण ऋण संकट ने और गंभीर रूख़ अख़्तियार कर लिया था.

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Image caption आईएमएफ़ प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने श्रृण संकट पर चेतावनी दी थी.

ये एक बहुत बड़ा संकट था जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और वैश्विक बाज़ारों में भारी चिंता थी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ़ ने चंद दिनों पहले अमरीका को चेतावनी दी थी कि वो जल्द ही अपने ऋण संकट का निपटारा करे या अमरीकी अर्थव्यवस्था को होनेवाले ज़बरदस्त झटके के लिए तैयार रहे.

क़र्ज़ लेने की सीमा न बढ़ाए जाने का मतलब था अमरीका के लिए पैसे से संबंधित छोटे-छोटे काम का कर पाना मुश्किल हो जाना जिसका असर ज़ाहिर है दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता. अमरीका दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की क़र्ज़ अदाएगी न कर पाने का असर ऋण दरों पर पड़ने की बात कही जा रही थी, जो ऊपर चली जाती, जिसका असर अमरीका अर्थव्यवस्था पर पड़ता और फिर वैश्विक मंदी से उबरने की प्रक्रिया को प्रभावित करता.

रिपब्लिकन पार्टी बार बार इस बात पर ज़ोर दे रहा था कि राष्ट्रपति ओबामा को टैक्स बढ़ाने की बजाए ख़र्च कम करना चाहिए. जबकि ओबामा कर बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं.

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