हैकिंग मामले में एचसीएल से पूछताछ

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Image caption एचसीएल का कहना है कि उसने न्यूज़ इंटरनेशनल की कोई भी जानकारी उन्होंने अपने पास नहीं रखी है.

फ़ोन हैकिंग विवादों से घिरी रुपर्ट मर्डोक की कंपनी न्यूज़ इंटरनेशनल ने भारतीय आईटी सेवा कंपनी एचसीएल को अपने सिस्टम में से हज़ारों ई-मेल मिटाने का आदेश दिया था.

इसी हैकिंग विवाद के कारण मर्डोक ने अपने बहुचर्चित ब्रितानी अख़बार न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड को बंद कर दिया था.

हिंदुस्तान कंप्यूटर्स लिमिटिड यानि एचसीएल ने ब्रितानी सांसदों को लिखे एक पत्र में बताया कि हैकिंग आरोपों से घिरी रूपर्ट मर्डोक की कंपनी न्यूज़ इंटरनेशनल ने अप्रैल 2010 और जुलाई 2011 के बीच नौ बार हज़ारों ई-मेल मिटाने के लिए कंपनी से अनुरोध किया था.

न्यूज़ इंटरनेशनल ने इस बीच लगभग दो लाख ऐसे संदेश मिटवाए, जो डिलिवर नहीं हो पाए थे. इसके अलावा वो संदेश भी मिटवाए गए जो काफ़ी पुराने थे.

एचसीएल का कहना है कि हालांकि उन्होंने न्यूज़ इंटरनेशनल के कंप्यूटर सिस्टम का प्रबंध संभाला था, लेकिन उसने कंपनी के ई-मेल अपने पास नहीं रखे हैं.

ब्रिटेन में न्यूज़ इंटरनेशनल के पत्रकारों की ओर से की गई फ़ोन हैकिंग की जांच एक संसदीय समिति कर रही है.

आंतरिक मामलों की समिति के अध्यक्ष कीथ वाज़ ने एचसीएल की ओर से भेजे गए पत्र के बारे में कहा, “एचसीएल के पत्र में बताई गई बातों से मैं आश्चर्यचकित हूँ. हज़ारों ई-मेल को मिटाया जाना कई सवालों को जन्म देता है और हम इस मामले की तह तक जाएंगें.”

एचसीएल का पक्ष

उनका कहना था कि एचसीएल से इस मामले में और सवाल किए जाएंगें.

लेकिन एचसीएल के वकील स्टुअर्ट बेन्सन ने ब्रितानी सांसदों को लिखे अपने पत्र में कहा, “अब ये पुलिस, संसदीय समिति और न्यूज़ इंटरनेशनल के बीच का मामला है. ई-मेल मिटवाए जाने के पीछे क्या मक़सद था, ये तो अब इन तीनों पक्षों से ही पता चल पाएगा.”

उधर न्यूज़ इंटरनेशनल का कहना है कि वो अपने मूल सिस्टम का एक बैक-अप रखता है और उसे रिकवर करने के लिए पुलिस को पूरा सहयोग दिया जा रहा है.

फ़ोन हैकिंग मामले की तह तक जाने के लिए न्यूज़ इंटरनेशनल के अख़बार ‘न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड’ के आंतरिक ई-मेल की गहन जांच की जा रही है.

सवाल उठाए जा रहे हैं कि आख़िर इतने सारे ई-मेल संदेशों को मिटाने के लिए क्यों कहा गया?

अख़बार पर आरोप हैं कि उसके पत्रकारों ने राजनीतिज्ञों, मशहूर हस्तियों और हत्या का शिकार हुए पीड़ितों के फ़ोन हैक किए और अंदरुनी जानकारी के लिए पुलिसकर्मियों को रिश्वत खिलाई.

इस बवाल के बाद न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड अख़बार को बंद कर दिया गया था.

कार्रवाई के तहत रूपर्ट मर्डोक और उनके बेटे जेम्स मर्डोक को संसदीय समिति के सामने पेश होने के लिए कहा गया था, जहां उनसे पूछताछ की गई थी.

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