बांग्लादेश का इकॉनॉमिस्ट पर आरोप

बांग्लादेश की विदेश मंत्री दीपू मोनी ने आरोप लगाया है कि जानी-मानी पत्रिका द इकोनॉमिस्ट देश के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार कर रही है.

दीपू मोनी ने इस पत्रिका में छपे उस लेख का हवाला दिया, जिसमें ये कहा गया था कि भारत ने सत्ताधारी पार्टी को साल 2008 के चुनाव में जीत दिलाने के लिए मदद और अनुदान दिया था.

इस पत्रिका में कहा गया था कि भारतीय रुपयों से भरे बैग और सलाह ने अवामी लीग पार्टी को सत्ता में आने में मदद की है.

विदेश मंत्री दीपू ने स्थानीय वेबसाइट बीडीन्यूज़ 24 को बताया कि जो रिपोर्ट छपी है, वह 'शर्मनाक' है.

इस लेख का शीषर्क था इम्ब्रेसिबल यू और इस पत्रिका में ये लिखा गया था कि वर्ष 2008 से भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में सुधार हुआ है, जब अवामी लीग पार्टी की 'भारतीयों रुपयों और सलाह' से आम चुनाव में जीत के लिए मदद की गई थी.

'रिश्ते कमज़ोर'

दीपू का कहना था कि इस लेख ने भारत और बांग्लादेश के दोस्ताना संबंधों को कमज़ोर कर दिया है.

उनका कहना था, "लोग ये जानते है कि अवामी लीग ने यह चुनाव इसलिए नहीं जीता है क्योंकि उसे किसी भी देश से पैसे या सलाह मिली है बल्कि लोगों ने उन्हें सरकार बनाने के लिए चुना है."

मोनी का कहना था कि इस पत्रिका ने इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में उन लोगों पर मुक़दमा चलाने का विरोध किया था, जिन पर बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में पाकिस्तान सेनाओं के साथ मिलकर लोगों पर अत्याचार करने का आरोप था.

साल 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई क़रीब नौ महीने चली थी जिसमें काफ़ी ख़ून ख़राबा हुआ था.

मंत्री ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि ये पत्रिका बांग्लादेश और सरकार के ख़िलाफ़ अभियान चला रही है.

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