क्रिस्टीन के ख़िलाफ जांच

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Image caption अगर क्रिस्टीन के ख़िलाफ़ औपचारिक मामला चलता है तो उनके लिए शर्मिंदगी का विषय होगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नई प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड के ख़िलाफ़ फ्रांस में पद का दुरुपयोग करने के मामले में जांच की जाएगी.

फ्रांस की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि क्रिस्टीन के ख़िलाफ़ फ्रांस के वित्त मंत्री रहने के दौरान पद के दुरुपयोग मामले की औपचारिक जांच की जाए.

क्रिस्टीन ने 2008 में फ्रांस के धनी उद्योगपति बर्नार्ड तापी और पूर्व में राष्ट्रीय बैंक रहे लियोनायस के बीच एक क़ानूनी विवाद में हस्तक्षेप किया था. इसी मामले में कोर्ट ने क्रिस्टीन के ख़िलाफ़ औपचारिक जांच का फैसला किया है.

अगर क्रिस्टीन के ख़िलाफ़ जांच की घोषणा के बाद आईएमएफ की उनकी अध्यक्षता भी सवालों के घेरे में आ सकती है.

जब फ्रांस में 2007 में निकोलस सार्कोजी राष्ट्रपति बने थे तो फ्रांस के उद्योगपति बर्नार्ड तापी सरकारी बैंक लियोनायस के साथ कोर्ट में क़ानूनी लड़ाई में फंसे हुए थे.

तापी का आरोप था कि जब नब्बे के दशक में उन्होंने एडीडैस कंपनी में अपने शेयर बेचे थे तो बैंक ने उन्हें धोखा दिया था. तापी वामपंथी बिजनेसमैन रहे हैं और फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट में मामला हार चुके थे. हार के बाद उन्होंने सार्कोज़ी के राष्ट्रपति प्रचार अभियान का समर्थन किया था.

सार्कोजी की जीत के कुछ महीनों बाद तत्कालीन वित्त मंत्री क्रिस्टीन लेगार्ड ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था और अपने ही अधिकारियों की राय को खारिज़ करते हुए बैंक औ तापी से मध्यस्थ की मदद से सुलह करने को कहा.

सुलह की प्रक्रिया के तहत आखिरकार तापी को बैंक ने 400 मिलियन डॉलर का मुआवज़ा दिया था.

क्रिस्टीन का कहना है कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है और न ही उन्हें किसी तरह का फ़ायदा हुआ है.

अब कोर्ट ने मामले की जांच तय कर दी है जो क्रिस्टीन के लिए काफी शर्मिंदगी वाली स्थिति बन सकती है.

फ्रास के राजनेताओं ने क्रिस्टीन के प्रति सहानुभूति जताई है लेकिन सोशलिस्ट नेता सेगोलीन रॉयल का कहना है कि क्रिस्टीन ने ‘ अकेले ये फै़सला नहीं किया और वो सार्कोजी के फैसले का शिकार हुई हैं.’

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