इतिहास के पन्नों से

अफ़्रीक़ा में दो अमरीकी दूतावासों पर बम हमले हुए और युगांडा के नेता इदी अमीन ने एशियाई मूल के लोगों के देश छोड़ने की तारीख़ तय कर दी.

1998: पूर्वी अफ़्रीक़ा में अमरीकी दूतावासों पर बम हमले

कीनिया और तंज़ानिया में अमरीकी दूतावासों में हुए बम धमाकों में कम से कम 200 लोग मारे गए थे जबकि एक हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

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Image caption बिल क्लिंटन ने हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि इसे अंजाम देने वालों को सज़ा दी जाएगी

स्थानीय समयानुसार लगभग साढ़े दस बजे हुए ये धमाके कुछ ही मिनटों के अंतराल पर हुए.

हालांकि किसी गुट ने इनकी ज़िम्मेदारी नहीं ली थी लेकिन अमरीकी अधिकारियों को श़क था कि हमलों में इस्लामी चरमपंथी गुट अल-का़यदा का हाथ है.

पहला बम धमाका तंज़ानिया की राजधानी दार-उस-सलाम में हुआ जबकि दूसरा धमाका कीनिया की राजधानी नैरोबी में हुआ था.

कीनिया स्थित अमरीकी दूतावास में हुआ धमाका इतना बड़ा था कि परिसर में स्थित एक चार मंजिली इमारत दूतावास की इमारत पर आ गिरी.

अमरीकी राजदूत प्रूडेंस बुशनेल इस धमाके में घायल हो गए थे.

बम धमाके के बाद नैरोबी शहर में अफ़रा तफ़री मच गई थी और अमरीकी दूतावास के बुलेट-प्रूफ दरवाज़े और खिड़कियाँ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे.

चश्मदीदों ने बताया कि बम धमाका इतना भीषण था कि उसकी आवाज़ 10 मील दूर तक सुनाई पड़ी.

दार-उस-सलाम में स्थित अमरीकी दूतावास पर हुए धमाके में इमारत का बाहरी हिस्सा तबाह हो गया और जो लोग बच गए थे वे विस्फोट के असर से पांच फ़िट दूर जाकर गिरे.

अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा था कि इसे अंजाम देने वालों को सज़ा दी जाएगी.

1972: एशियाई लोगों को युगांडा छोड़ने के आदेश

Image caption युगांडा की अर्थव्यवस्था में ऐशियाई मूल के लोगों का प्रमुख योगदान था.

आज ही के दिन युगांडा के नेता इदी अमीन ने एशियाई मूल के लोगों को देश छोड़ कर जाने के लिए 90 दिनों की मोहलत दी थी.

जिस समय इदी अमीन ने ये आदेश जारी किए थे उस दौरान युगांडा की अर्थव्यवस्था में एशियाई मूल के लोगों का प्रमुख योगदान था.

जनरल अमीन ने कहा था कि लगभग 60,000 एशियाई मूल के लोग जिनके पास युगांडा की नागरिकता नहीं है वे अगले 90 दिनों के भीतर देश छोड़ कर चले जाएं.

पिछले कुछ समय से युगांडा की बहुसंख्यक अश्वेत जनसँख्या में एशियाई मूल के लोगों के प्रति रोष बढ़ा गया था.

जनरल अमीन ने युगांडा में रहने वाले एशियाई मूल के लोगों को 'खून पीने वाला' बताया था और कहा था कि वे युगांडा की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा किए हुए हैं.

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