अमरीका को उठाने होंगे 'बेहतर क़दम'

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Image caption अमरीकी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के इस दौर का असर विश्वभर के शेयर बाज़ारों पर पड़ा है.

अमरीकी कर्ज़ संकट से निपटने के लिए किए गए समझौते के बाद अमरीका ने कहा है कि आर्थिक संकट के इस दौर से निकलने के लिए उसे ‘बेहतर प्रयास करने होंगे’.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्ने ने कहा है कि कर्ज़ लेने की सीमा बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलने में देर भी हुई और यह फैसला काफी खींचतान के बाद लिया जा सका.

इन चुनौतियों के बीच जे कार्ने ने कहा है कि इस गंभीर आर्थिक संकट से निपटने और अमरीकी अर्थव्यवस्था पर एक बार फिर विश्वास कायम करने के लिए अमरीका को अपना सामर्थ्य, निष्ठा और एकजुटता दिखानी होगी.

ग़ौरतलब है कि यह बयान अमरीका के बढ़ते बजट घाटे की चिंताओं के बीच स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) संस्था की ओर से लंबी अवधि की क्रेडिट रेटिंग एएए+ से घटाकर एए+ किए जाने के बाद आया है.

अमरीकी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के इस दौर का असर विश्वभर के शेयर बाज़ारों पर पड़ा है.

अमरीकी और यूरोपीय बाज़ारों में आई गिरावट के बाद भारतीय बाज़ार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई.

दरअसल अधिकतर निवेशकों को डर है कि दुनिया में अर्थव्यवस्था को बचाने की कोशिशों का दम निकल रहा है. यूरोप में ऋण संकट गहराता जा रहा है जहाँ स्पेन या इटली के ऋण से निबट नहीं पाने का डर और ज़्यादा हो गया है.

इन दोनों ही देशों में बैंक पैसा जुटाने में विफल हो रहे हैं और अब ये चिंता हो गई है कि इससे पूरे यूरोप में ऋण के लिए धन मिलना मुश्किल हो जाएगा और इसका असर देशों के विकास पर पड़ सकता है.

निवेशकों का डर

दूसरी बड़ी चिंता अमरीकी अर्थव्यवस्था की सेहत की है. पिछले कुछ महीनों में इस अर्थव्यवस्था में एक ठहराव सा आ गया है जबकि आर्थिक प्रगति रुक गई है और बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है.

यूरोप को लेकर एक ये छवि बन रही है कि यूरोपीय नेता एकजुट होकर इस क्षेत्र के संकट से निबटने में विफल हो रहे हैं और इस क्षेत्र में एक स्पष्ट नेतृत्त्व नहीं है.

इन सबका नतीजा ये हो रहा है कि अनिश्चितता की स्थिति बढ़ती जा रही है जहाँ अब तक सुरक्षित लगने वाले निवेश भी ख़तरे से भरे दिख रहे हैं और निवेशक इससे बचने की राह तलाशने में लग गए हैं.

क़र्ज़ लेने की सीमा को बढ़ाने जाने के समझौते के तहत अगले 10 सालों में सरकारी ख़र्चो में एक खरब डालर की कमी की जाएगी. इस मसले पर गठित एक समीति ख़र्च में कटौती पर नवंबर तक एक रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.

इस बीच अमरीकी क्रेडिट रेटिंग गिरने के बाद विश्वभर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

जहां चीन के सरकारी मीडिया ने अमरीका को आर्थिक दिक्कतों से निपटने की सलाह देते हुए चीन की अमरीकी मुद्रा में संपत्ति की रक्षा की बात कही है, वहीं दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस मुद्दे पर अफवाहों का बाज़र गर्म होने की चेतावनी दी है.

फ्रांस और जापान ने कहा है कि उन्हें अमरीकी अर्थव्यवस्था की मज़बूती पर पूरा विश्वास है और उन्हें भरोसा है कि अमरीका इस मुश्किल दौर से बाहर निकलेगा.

जानकारों का मानना है सभी देश सोमवार को बाज़ार खुलने से पहले इस मसले पर एकजुटता का माहौल बनाना चाहते हैं.

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