'ग़लतफ़हमी में न रहें अमीर देश'

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चीन ने अमरीका और आर्थिक संकट से जूझ रहे अन्य विकसित देशों की स्थिति पर चिंता जताई है.

चीन की सरकारी अख़बार चाइना डेली की वेबसाइट में आगाह किया है कि अगर कर्ज़ के बोझ तले दबे अमीर देश कड़े क़दम नहीं उठाते तो आर्थिक मंदी दोबारा वार करेगी और ये वार वैश्विक अर्थव्यवस्था को करारा झटका दे सकता है.

चीन ने आलोचना करते हुए कहा है कि जब तीन साल पहले मंदी आई थी तो अमीर देशों ने कुछ शुरुआती क़दम उठाए थे. पर उसके बाद से ये देश कठिन और मुश्किल आर्थिक क़दम उठाने से बचते रहे हैं जो विकास के लिए ज़रूरी थे.

'ऋण संकट सुलझाएँ'

वेबसाइट पर लिखा है, “तीन साल पहले जब विश्व आर्थिक संकट में था तो चीन जैसे विकासशील देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए अपने यहाँ बड़े आर्थिक पैकेज दिए. जबकि विकासशील देशों ने सार्वजनिक पैसे का इस्तेमाल कर अपने बैंको को बचाया. इन सबका मकसद संकट से उबरना था. लेकिन अमीर देशों ने अपने यहाँ कर्ज़ का बोझ बढ़ने दिया, ये अपनी आर्थिक-सामाजिक-राजनीतिक समस्यों का आसान हल निकालने का नतीजा है.”

चीन ने ख़ासतौर पर अमरीका पर बढ़ते कर्ज़ के बोझ पर चिंता जताई है. चीन का कहना है कि अमरीका उसका सबसे बड़ा कर्ज़दार है और इस कारण अमरीका के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिति से उसका हित भी जुड़ा हुआ है.

वेबसाइट पर लिखा है कि अमरीका और यूरोपीय संघ में नीति निर्धारकों को अब इस ग़लतफ़हमी में और नहीं रहना चाहिए कि उनका ऋण संकट बिना कड़े क़दम उठाए हल हो जाएगा.

वेबसाइट के मुताबिक पिछली बार की आर्थिक मंदी की तुलना में इस बार देशों के सामने विकल्प कम हैं.

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