भारत से भी हुए साइबर हमले : चीन

Image caption चीन ने अमरीका और भारत पर साइबर जासूसी का आरोप लगाया है

चीन ने कहा है कि पिछले साल उस पर क़रीब पांच लाख साइबर हमले हुए. इनमें से आधे हमले विदेशों से किए गए जिनमें अमरीका और भारत भी शामिल हैं.

ये ख़बर अमरीकी कंपनी मैकाफ़ी के उस बयान के कुछ दिनों बाद ही आई है जिसमें कंपनी ने वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे साइबर जासूसी अभियान का पता लगाने का दावा किया था.

मैकैफ़ी का कहना था कि ये पंचवर्षीय लक्षित जासूसी अभियान एक अनाम देश चला रहा है.

कई विश्लेशकों का मानना है कि ये अनाम देश चीन हो सकता है.

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन पर किए गए ज़्यादातर साइबर हमले ट्रोजन सॉफ़्टवेयर के रूप में किए गए हैं जो कि एक दुर्भावनापूर्ण छद्म प्रोग्राम है.

चीन के नेशनल कम्प्यूटर नेटवर्क इमरजेंसी रेस्पॉन्स कोऑर्डिनेशन सेंटर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन पर किए गए घातक साइबर हमलों में से 15 फ़ीसदी अमरीका से किए गए जबकि आठ फ़ीसदी हमले भारत से किए गए.

चीन का इनकार

Image caption चीन पर भी कई देशों पर साइबर हमले के आरोप लग चुके हैं

इंटरनेट का इस्तेमाल करनेवालों की सबसे बड़ी 48.5 करोड़ संख्या वाले देश चीन पर खुद सरकारी एजेंसियों और कंपनियों के ख़िलाफ़ साइबर हमले के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि चीन इस बात से हमेशा इनकार करता रहा है.

चीन की सरकारी मीडिया ने मैकैफ़ी के उन दावों की कड़ी आलोचना की है जिसमें चीन पर बड़े पैमाने पर साइबर हैकिंग के आरोप लगाए गए हैं.

अमरीका की एक कम्प्यूटर सुरक्षा प्रदान करनेवाली कंपनी के मुताबिक़ कनाडा, भारत, दक्षिण कोरिया, ताइवान, अमरीका और वियतनाम चीनी साइबर हमले के निशाने पर रहे हैं.

इसी साल जून में इंटरनेट कंपनी गूगल ने कहा था कि चीन के एक साइबर जासूसी अभियान ने वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों, सेना के अफ़सरों, पत्रकारों और चीन के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के जीमेल अकाउंट को निशाना बनाया था.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री, विदेश और रक्षा मंत्री के कम्प्यूटर हैक किए जाने की आशंका भी मार्च महीने में जताई गई थी और संदेह चीन पर ही व्यक्त किया गया था.

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