चरमपंथी गुटों के प्रति कोई नरमी नहीं: असद

Image caption सीरिया के राष्ट्रपति असद ने कहा विद्रोहियों के प्रति नरमी नहीं बरतेंगे

सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद ने कहा है कि वो देश में 'सक्रिय चरमपंथी गुटों के प्रति' नरमी नहीं बरतेंगे.

तुर्की के विदेश मंत्री अहमत दावूतोग्लू के साथ छह घंटे तक चली लंबी वार्ता के बाद उन्होंने ये बयान दिया है.

अहमत दावूतोग्लू ने सीरिया से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ जारी सैन्य अभियान ख़त्म करने की अपील की है.

तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि सीरियाई सेना प्रदर्शनों पर नियंत्रण के लिए जो तरीक़ा अपना रही है उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता.

इसके साथ ही उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति को वो उपाय भी सुझाए जिससे देश में जारी ख़ून-ख़राबे को रोका जा सकता है.

इस बीच सुरक्षा बलों का अभियान जारी है और ख़बरों के मुताबिक़ ताज़ा हिंसा में कम से कम 30 लोग मारे गए हैं.

इस साल मार्च में शुरू हुए विद्रोह में कम से कम 1,700 आम नागरिकों के मारे जाने की ख़बर है.

जबकि दसियों हज़ार लोग कथित रूप से ग़िरफ़्तार किए गए हैं.

इस बीच ख़बर है कि अमरीका राष्ट्रपति असद के नेतृत्व वाली सरकार पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है.

एक अमरीकी अधिकारी ने बताया कि अमरीका सीरिया के बड़े वित्तीय और व्यावसायिक ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश करेगा जिनसे राष्ट्रपति असद की सत्ता को ज़रूरी मदद मिलती है.

अहम क़दम

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Image caption हमा शहर में टैंकों से हमले किए जा रहे हैं

राष्ट्रपति असद कथित चरमपंथियों के प्रति नरमी नहीं बरतनेवाला बयान तुर्की के विदेश मंत्री दावूतोग्लू से राजधानी दमिश्क में हुई बैठक के बाद आया है.

दोनों नेताओं के बीच हुई वार्ता को लेकर सीरिया के सरकारी दस्तावेज़ में राष्ट्रपति असद के हवाले से ये कहा गया है कि,''सुरक्षा बल चरमपंथी गुटों के प्रति नरमी नहीं बरतेंगे ताकि देश की स्थिरता और उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.''

राष्ट्रपति असद ने ये भी कहा कि प्रस्तावित सुधार कार्यक्रमों को लेकर वो गंभीर हैं.

दस्तावेज़ में तुर्की के विदेश मंत्री दावूतोग्लू को ये कहते हुए दिखाया गया है कि वो किसी का कोई संदेश लेकर नहीं आए हैं और राष्ट्रपति असद के सुधार कार्यक्रमों के लागू हो जाने के बाद सीरिया पूरे क्षेत्र के लिए एक उदाहरण बनकर उभरेगा.

तुर्की और सीरिया के बीच संबंधों को सुधारने में मुख्य भूमिका निभानेवाले विदेश मंत्री दावूतोग्लू ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सीरिया में आम नागरिकों की हत्या रोकने के लिए कारगर क़दम उठाए जाने पर चर्चा हुई.

सीरिया के राष्ट्रपति के साथ बातचीत के बाद तुर्की लौटने पर दावूतोग्लू ने कहा कि सीरियाई सेना जो तरीक़े इस्तेमाल कर रही है उसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता.

उन्होंने उन उपायों के बारे में भी बताया जिनकी मदद से सीरिया देश में जारी ख़ूनख़राबे को रोक सकता है.

उन्होंने कहा,''हमने उन उपायों पर चर्चा की जिनकी मदद से सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच के टकराव और मध्यवर्ती शहर हमा में जारी तनाव को रोका जा सकता है. आनेवाले दिनों में ही ये पता चल सकेगा कि जो उम्मीद हमने लगाई है वो पूरी होती है या नहीं. हम आशा करते हैं कि सीरिया में शांति स्थापित हो सकेगी और सुधार के कार्यक्रम लागू हो सकेंगे.''

तुर्की के विदेश मंत्री के सीरिया दौरे से पहले ही प्रधानमंत्री रेसेप ताय्यीप अर्डोगन ने शीर्ष राजनयिकों को ये कड़ा संदेश देने को कहा था कि तुर्की चाहता है कि सीरिया में आम नागरिकों के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान ख़त्म किया जाना चाहिए.

राजनयिक वापस बुलाए गए

शनिवार से सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत ने सीरिया में तैनात अपने राजदूतों को वापस बुला लिया है और आम नागरिकों के ख़िलाफ़ सेना के इस्तेमाल को तुरंत रोकने की मांग की है.

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Image caption सीरिया के कई शहरों में सरकार के ख़िलाफ प्रदर्शन जारी हैं

भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक भी प्रदर्शनकारियों की हत्या रोकने की अपील लेकर इसी हफ़्ते सीरिया पहुंचने वाले हैं.

सीरिया में जारी हिंसा को रोकने के लिए पिछले हफ़्ते जो भी कोशिशें की गईं उनके कुछ ख़ास नतीजे नहीं निकले हैं. इस बीच तीन सौ से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं.

मंगलवार को हमा के बाहर के शहरों और गांवों में सीरियाई सेना और टैंकों के हमले में कम से कम सात लोग मारे गए हैं जबकि बिन्नीश शहर में तीन लोग मारे गए हैं.

उधर, पूर्वी दीर अल ज़ॉर शहर में सरकारी सेना के अभियान में रविवार से 60 से ज़्यादा नागरिकों की मौत हो गई है.

अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों के सीरिया तक पहुंचने पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं.

चश्मदीदों और कार्यकर्ताओं के दिए ब्योरे की जांच कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है.

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