'ख़र्चों में कटौती के साथ विकास का ध्यान रहे'

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Image caption आईएमएफ़ प्रमुख ने कहा कि विकास में कमी बाज़ारों को प्रभावित कर सकती है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ़ प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने हुकूमतों को चेतावनी दी है कि वो ख़र्चों में कटौती और अल्प-अवधि में आर्थिक प्रगति के लिए फंड मुहैया कराने में सामंजस्य स्थापित करें.

क्रिस्टीन लैगार्ड का कहना है कि यह 'डबल डिप रिशेशन' या मंदी की दोहरी मार से बचने के लिए ज़रूरी है.

व्यावसाय जगत के अख़बार 'द फ़ाईनेंसियल टाईम्स' में लिखते हुए लैगार्ड ने माना है कि आर्थिक मज़बूती के लिए कर्ज़ों में कमी किए जाने की सख़्त ज़रूरूत है.

लेकिन साथ ही कहा है कि अगर ख़र्चों में बहुत तेज़ी से कमी की गई तो इसका असर नौकरियों पर पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि अल्प-अवधि में विकास के लिए आर्थिक मदद दिया जाना अहम है.

यूरो मुद्रा क्षेत्र

उनका ये बयान वित्तीय बाज़ार में हाल में आई उथल-पथल और उसकी वजह से अमरीका और यूरोपीय देशों के अधिक ख़र्चों पर उठे सवालों के बाद आया है.

आईएमएफ़ प्रमुख ने कहा है कि हालांकि विश्व अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास कम हुआ है लेकिन अभी सारी नीतियों को लागू करके नहीं देखा गया.

उन्होंने अख़बार में कहा कि योजनाकारों को वही करना चाहिए जो उन्होंने साल 2008 की मंदी के समय एक ही लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया था.

मंगलवार को यूरो मुद्रा क्षेत्र में आए क़र्ज़ संकट के मसले को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल के बीच पेरिस में बैठक हो रही है.

आईएमएफ़ प्रमुख ने कहा है कि बाज़ार आर्थिक मज़बूती पर वाहवाही करता है लेकिन उसे विकास में कमी भी पसंद नहीं.

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