दंगों के लिए कड़ी सज़ा पर चिंता

लंदन दंगे (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट bbc

सांसदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल के दंगों में शामिल लोगों में से कुछ को दी गई सज़ा बहुत सख़्त है.

मंगलवार को फ़ेसबुक पर अपने संदेशों के ज़रिए दंगे फैलाने के आरोप में दो लोगों को चार साल जेल की सज़ा सुनाई गई है और एक व्यक्ति की कार में चोरी का टीवी पाए जाने पर उसे 18 महीनों की सज़ा सुनाई गई है.

लिबरल डेमोक्रेट सांसद टॉम ब्रेक ने कहा है कि 'सज़ा को सुधारात्मक होना चाहिए न कि बदला लेने वाला'.

लेकिन सामाजिक मामलों के मंत्री एरिक पिकल्स ने कहा है कि कड़ी सज़ाओं से ही ज़ाहिर हो सकता है कि गड़बड़ी फैलाने का अंजाम बुरा होता है.

इंग्लैंड में पिछले दिनों हुए दंगों के सिलसिले में विभिन्न शहरों में 2,270 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

मंगलवार की दोपहर तक 1,277 अभियुक्तों को अदालत में पेश किया जा चुका था.

अदालत और ट्राइब्यूनल सेवाओं के अधिकारियों का कहना है कि क़ानूनी सलाहकार न्यायाधीशों को सलाह दे रहे हैं जिससे कि वो ये सुनिश्चित कर सकें कि अपराध के अनुसार समुचित सज़ा देने का अधिकार उनके पास हैं या नहीं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अगर अदालत के पास पर्याप्त अधिकार न हों तो वो मामले को उच्च अदालत को भेज सकते हैं.

कड़ी सज़ा

बीबीसी के एक कार्यक्रम में टॉम ब्रेक ने कहा कि कुछ लोगों को जो सज़ा मिली है वो कुछ अलग होती अगर ये अपराध दंगों के पहले किए गए होते.

उनका कहना है कि सज़ा ऐसी होनी चाहिए जो सुधारात्मक हो न कि बदला लेने वाली.

क्रिमिनल बार एसोसिएशन के पूर्व प्रमुख पॉल मेंडेल ने बीबीसी से कहा, "यदि वे लंबे समय के लिए जेल भेजे जाते हैं तो वे अपनी नौकरी खो देंगे और इससे और अधिक सामाजिक बाधाएँ आएंगीं और आपको पता चलेगा कि समाज को अभी किए गए अपराध से कहीं अधिक भुगतना पड़ेगा."

उन्होंने कहा, "किसी परिस्थिति में फँसे लोग असामान्य सा व्यवहार करने लगते हैं, इसी तरह से ख़तरा है कि अदालतें भी इसी तरह के एक सामूहिक उन्माद में फँस जाएँ, मैं किसी हिंसा की ओर इशारा नहीं कर रहा हूँ लेकिन जनता की इच्छा को सज़ा में दर्शाने की इच्छा से सज़ा बहुत लंबी और कड़ी हो सकती है."

लेकिन पिकल्स ने बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा, "हमें ये समझना होगा कि ये किसी वजह शुरु हुई हिंसा थी. हम नहीं चाहते कि लोग अपने घरों में अपनी सुरक्षा की चिंता करते रहें."

"इसलिए इस तरह की सज़ाएँ देना ज़रुरी है. जिससे कि अपराध करने से पहले सज़ा का डर बना रहे."

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा लगता है कि लोग उनकी बात से सहमत हैं.

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