लीबिया: त्रिपोली पर कब्ज़े के लिए संघर्ष

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लीबिया में छिड़े भीषण संघर्ष के बीच विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली पर कब्ज़े की कार्रवाई को निर्णायक रुप से तेज़ कर दिया है.

हालांकि कर्नल गद्दाफ़ी ने कहा है कि उनके समर्थकों ने राजधानी त्रिपोली पर कब्ज़े की कोशिश कर रहे विद्रोहियों को खदेड़ दिया है.

दोनों पक्षों के बीच छिड़ी लड़ाई के दौरान कर्नल गद्दाफ़ी की ओर से जारी एक संदेश में कहा गया है कि ‘विद्गोही लीबिया को तबाह करने पर आमादा हैं.’

बेनग़ाज़ी में मौजूद विद्रोहियों के एक नेता अब्देल हाफ़िज़ घोगा ने कहा है कि विद्रोहियों को त्रिपोली के पूर्वी, पश्चिमि और दक्षिणी इलाकों में मौजूद लोगों से समर्थन मिल रहा है.

इस बीच त्रिपोली में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से बताया है कि कई ज़िलों में भीषण गोलीबारी जारी है.

त्रिपोली से सटे लीबिया के बाकी इलाकों में भी विद्रोही अपने कब्ज़े में आए शहरों पर तैनात हैं. लेकिन विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित कुछ इलाकों से अब भी बमबारी की खबरें आ रही हैं.

शनिवार शाम को जारी एक संदेश में कर्नल गद्दाफ़ी के सूचना मंत्री मूसा इब्राहिम ने त्रिपोली पर कब्ज़े की कोशिशों को नियंत्रित बताते हुए कहा कि ‘ये कुछ छोटे हथियार बंद समूहों की गतिविधियां हैं.’

‘अंतत: जीत हमारी होगी’

मूसा इब्राहिम ने कहा कि ‘अंतत: जीत हमारी होगी.’

इससे पहले विद्रोहियों ने त्रिपोली से 160 किलोमीटर पूर्व में स्थित ज़िल्तान शहर और त्रिपोली से सिर्फ़ 30 किलोमीटर दूर ज़ाविया शहर पर भी उनका नियंत्रण हो गया है.

विद्रोहियों का कहना है कि इस लड़ाई में उन्हें भारी नुकसान हुआ है.

ज़ाविया पर विद्रोहियों के नियंत्रण से त्रिपोली का संपर्क ट्यूनिशिया से कट जाएगा जो गद्दाफी की सेना के लिए राहत का एक बड़ा ज़रिया बना हुआ है.

गुरुवार को विद्रोहियों ने शहर के बाहर एक तेल शोधन संयंत्र को अपने कब्ज़े में ले लिया था. इसी संयंत्र से गद्दाफ़ी की सेनाओं को तेल दिया जा रहा था.

विद्रोही सेनाओं त्रिपोली के दक्षिण से भी आक्रमण कर रही हैं.

गद्दाफ़ी का साथ छोड़ा

संयुक्त राष्ट्र के आदेश पर नैटो सेनाओं ने त्रिपोली के आसपास नो फ्लाई ज़ोन बना रखा है ताकि हवाई हमलों न हों और आम नागरिकों को बचाया जा सके. नैटो सेनाओं ने त्रिपोली का समुद्र से संपर्क भी काट दिया है.

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी के पूर्व सहयोगी यूरोप जा रहे हैं और उन्होंने गद्दाफ़ी का साथ छोड़ दिया है.

अबदल सलाम ने 1969 में हुए तख्तापलट में गद्दाफ़ी की मदद की थी लेकिन नब्बे के दशक में गद्दाफ़ी से उनके मतभेद पैदा हो गए थे.

लीबिया में फरवरी के महीने में उस समय विद्रोह शुरु हुआ जब पड़ोसी देश ट्यूनीशिया में जनविद्रोह के बाद तख्तापलट हो गया.

मिस्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच लीबिया में भी प्रदर्शन हुए लेकिन गद्दाफी के सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का प्रयोग किया जिसके बाद वहां संघर्ष सशस्त्र हो गया.

लीबिया में संघर्ष शुरु होने के बाद साठ हज़ार से अधिक अप्रवासी मज़दूर देश से निकलने में सफल रहे हैं लेकिन अभी भी हज़ारों विदेशी कामगार लीबिया में मौजूद हैं.

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