सीरिया में जाँच के आदेश

नवी पिल्लै (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की प्रमुख ने स्थिति को आपातकालीन बताया है

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद ने सीरिया में आम नागरिकों पर अत्याचार के आरोपों की जाँच के आदेश दिए हैं.

परिषद ने एक प्रस्ताव पारित करके एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जाँच दल को सीरिया भेजने की घोषणा की है, परिषद ने कहा है कि वहाँ जारी उत्पीड़न तुरंत रुकना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मार्च से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक दो हज़ार से अधिक आम नागरिक मारे जा चुके हैं.

इस प्रस्ताव के समर्थन में 33 और इसके ख़िलाफ़ चार वोट डाले गए जबकि नौ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

प्रस्ताव का विरोध करने वाले देशों में चीन, रूस और क्यूबा शामिल हैं. इन देशों के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को राजनीति से प्रेरित और एकतरफ़ा बताते हुए इसके ख़िलाफ़ वोट दिया.

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद की प्रमुख नवी पिल्लै ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किए जाने की बातें सामने आ रही हैं उसे देखते हुए यह एक आपातकालीन स्थिति है.

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ऊपर तोप के गोले दाग़ने को आवश्यकता से अधिक बलप्रयोग कहना किसी तरह से ग़लत नहीं होगा.

मानवाधिकार परिषद की इस बैठक का सीरिया के पड़ोसी देशों सऊदी अरब और जॉर्डन ने भी समर्थन किया है.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सीरिया संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के साथ सहयोग करेगा और अंतरराष्ट्रीय जाँच दल को सीरिया में जाँच करने की अनुमति देगा.

नवी पिल्लै का कहना है कि सीरिया में हिंसा रुकने की जगह बढ़ती जा रही है और जब से रमज़ान का महीना शुरू है तभी से 350 लोग मारे जा चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून का कहना है कि यह चिंताजनक बात है कि राष्ट्रपति असद सैनिक कार्रवाई रोकने का अपना वादा पूरा नहीं कर रहे हैं.

सीरिया की सरकार का कहना है कि हथियारबंद गिरोह सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को निशाना बना रहे हैं इसलिए सरकार को कार्रवाई करनी पड़ रही है.

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