लीबिया में संयुक्त राष्ट्र अहम भूमिका निभाए:मून

लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधी लड़ाके इमेज कॉपीरइट BBC World Service

लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधी लड़ाकों और कर्नल गद्दाफ़ी की सेना के बीच बानी वालिद शहर के आसपास झड़पें हो रही हैं. गद्दाफ़ी के विरोधियों का मानना है कि वे संभवत: इस शहर में छिपे हुए हैं.

गद्दाफ़ी के विरोधी लड़ाकों ने बानी वालिद और गद्दाफ़ी के गृह नगर सियर्ट में मौजूद उनके समर्थकों को आत्मसमर्पण के लिए शनिवार तक का समय दिया है.

नैटो ने चेतावनी दी है कि ऐसा प्रतीत होता है कि गद्दाफ़ी अब भी अपनी सेनाओं का संचालन कर रहे हैं. नैटो के प्रवक्ता कर्नल रोलां लेवोई ने कहा है कि गद्दाफ़ी की सेनाएँ बिखरी नहीं हुई हैं.

अल्जीरिया भागा गद्दाफ़ी का परिवार

लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधियों की अंतरिम राष्ट्रीय परिषद ने कहा है कि उसे लीबिया में अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की मौजूदगी स्वीकार नहीं है.

उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र लीबिया के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाए. उन्होंने सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया है कि वह लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद की ओर से आने वाले किसी भी मदद के आग्रह पर जल्द कार्रवाई करे.

फ़रवरी में ट्यूनिशिया और मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद लीबिया समेत अनेक लोगों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए थे. लीबिया में शस्त्र विद्रोह चला और अब लीबिया के अधिकतर क्षेत्र पर उनका कब्ज़ा है.

कहाँ है गद्दाफ़ी की दौलत?

कर्नल गद्दाफ़ी का कुछ अतापता नहीं है और उनके परिवार के कई सदस्यों ने पड़ोसी देश अलजीरिया में जाकर शरण ली है.

संयुक्त राष्ट्र की डगर कठिन

लीबिया में जंग के बाद पुनर्निर्माण के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत इयान मार्टिन ने कहा है कि संभावना है कि लीबिया का अंतरिम नेतृत्व नया पुलिस बल गठित करने में मदद मांगेगा.

बीबीसी संवाददाता निक चाईलड्स का कहना है, "वैसे तो गद्दाफ़ी विरोधी लड़ाकों ने लीबिया में अंतरराष्ट्रीय सेना के होने का विरोध किया है लेकिन पहले से ही ऐसी कोई पेशकश थी ही नहीं. हाँ, निरीक्षक दल पर चर्चा ज़रूर हुई थी लेकिन लड़ाके वो भी नहीं चाहते. लेकिन अंतरिम नेतृत्व मानता है कि उसे राजनीतिक, मानवीय और आर्थिक क्षेत्रों में मदद की ज़रूरत होगी."

अंतरिम नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की मौजूदगी मंजूर नहीं

निक चाईलड्स का मानना है, "जिन पश्चिमी देशों में गद्दाफ़ी विरोधियों का इस दौर में समर्थन किया है वे भी चाहेंगे कि जब तक गद्दाफ़ी विरोधी अपने वादे पूरे नहीं कर लेते, तब तक वे उनका समर्थन करें. ये बहुत बड़ा काम होगा."

बीबीसी के निक चाईलड्स मानते हैं कि ये ताकतें ये भी चाहेंगी कि ये मदद संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों और सुरक्षा परिषद के नए प्रस्ताव के तहत हो.

उनका ये भी कहना है कि ये कठिन कूटनितिक प्रक्रिया होगी क्योंकि रूस और चीन समेत कई देशों को लीबिया पर पिछले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निष्कर्ष पर आपत्ति थी.

फ़्रांस के बाद, इटली खोलेगा दूतावास

इटली ने कहा है कि वह गुरुवार से त्रिपोली में अपना दूतावास खोल देगा.

संभवत: गद्दाफ़ी सेना का संचालन कर रहे हैं: नैटो

ये घोषणा उस समय की गई जब इटली ने कहा है कि वह रोम में लीबिया के 72 करोड़ डॉलर की राशि के इस्तेमाल पर लगी पाबंदी हटा रहा है और इसे राष्ट्रीय अंतरिम परिषद के सुपुर्द कर दिया जाएगा.

फ़्रांस ने कुछ हद तक सोमवार को त्रिपोली में अपना दूतावास खोला था.

ब्रिटेन की भी योजना है कि लीबिया के साथ कूटनीतिक संबंध दोबारा शुरु किए जाएँ.

ब्रिटेन बुधवार को लीबिया के लिए 0.5 अरब डॉलर की राशि पहुँचा रहा है.

ये राशि लीबियाई दिनार के नोटों में है जो लंदन में छापे गए थे लेकिन उन्हें संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के कारण ज़ब्त कर लिया गया था.

संबंधित समाचार