इतिहास के पन्नों से

इतिहास के पन्नों में एक सितंबर कई वजहों से दर्ज है.

1939 जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण.

Image caption हिटलर की सेनाओं ने पोलैंड पर आक्रमण बिना किसी पूर्व चेतावनी के किया था

एक सितंबर 1939 को जर्मनी की सेनाओं ने पोलैंड पर आक्रमण किया था. हिटलर की सेनाओं ने ये आक्रमण बिना किसी पूर्व चेतावनी के किया था. इसके साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध की शुरूआत हो गई.

पौ फटने से पहले जर्मन सेना टैक, बख्तरबंद गाडियॉ और डेढ़ लाख सैनिक गोला-बारुद समेत पोलैंड पर आक्रमण करने के लिए कमर कस चुकीं थीं.

सवेरा होते ही जर्मन सेना के युद्धक विमानों ने पोलैंड पर हवाई हमले शुरू कर दिए.सुबह नौ बजे राजधानी वारसा पर हवाई बम बरसने लगे.

जवाब में फ्रांस, ब्रिटेन, और राष्ट्रमंडल के देशों ने जर्मनी को पोलैंड से सेनाओं को हटाने की चेतावनी दी थी. इन देशों ने अपनी सेनाओं का जमावड़ा करना शुरू कर दिया था और जर्मनी से युद्द की तैयारी करने में जुट गए.

पोलैंड ने मदद की गुहार लगाई थी लेकिन सारलैंड पर एक छोटे फ्रांसीसी हमले के सिवाय पोलैंड को कोई सैन्य सहायता मिली.

1997 प्रिंसेस डायना की मौत की जाँच

Image caption कार चालक हेनरी पॉल बेहद नशे में 161 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे.

पहली सितंबर से एक दिन पहले यानी 31 अगस्त को पेरिस में प्रिंसेस डायना की कार दुर्घटना में मौत हो गई थी. एक सितंबर को प्रिंसेस डायना की मृत्यु के कारणों पर फ्रांसीसी जाँचकर्ताओं ने कहा था कि कार का चालक बेहद नशे में था और 161 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज़ रफ्तार से गाड़ी चला रहा था.

पेरिस में जाँचकर्ताओं ने बताया था कि कार चालक हेनरी पॉल की खू़न की जाँच में अल्कोहल की मात्रा फ्रांस में निर्धारित मानदंडों से तीन गुना ज़्यादा पाई गई.

लेकिन डोडी अल फ़याद के वकील का कहना था कि दुर्घटना मोटरसाइकिल पर उनका पीछा सवार कर रहे फ़ोटोग्राफ़रों की वजह से हुई.

हादसे में डायना के दोस्त डोडी अल फ़याद और कार के ड्राइवर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि डायना की मौत अस्पताल में हुई थी.

1969 लीबिया में रक्तहीन तख़्तापलट

Image caption लीबिया में जब तख़्तापलट हुआ तो शासक इदरिस उस समय टर्की में थे

आज ही के दिन लीबिया में रक्तहीन तख़्तापलट हुआ और शासक इदरिस को अपदस्थ कर दिया गया.

सेना के अधिकारियों के एक समूह ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया और देश को गणतंत्र घोषित कर दिया. शासक इदरिस उस समय टर्की में थे उन्होंने इस तख़्तापलट को ख़ारिज कर दिया.

सुबह सेना के टैकों और सैनिकों ने राजधानी त्रिपोली को घेर लिया और राजमहल समेत सभी प्रमुख ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया.

लीबिया के युवराज ने नई सत्ता का समर्थन की घोषणा की. मिस्र और इराक ने रिवोल्यूशनरी कमांड काउंसिल को मान्यता दे दी

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