गद्दाफ़ी विरोधी 60 देशों के समक्ष रखेंगे योजनाएँ

लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधी इमेज कॉपीरइट AFP

साठ देशों के नेता और अधिकारी की मौजूदगी में लीबिया की गद्दाफ़ी विरोधी राष्ट्रीय अंतरिम परिषद गुरुवार को देश के भविष्य के बारे में अपनी योजनाएँ रखेगी.

पेरिस में हो रहे इस सम्मेलन की अध्यक्षता फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कर रहे हैं.

रूस ने भी राष्ट्रीय अंतरिम परिषद को मान्यता दे दी है.

अल्जीरिया भागा गद्दाफ़ी का परिवार

'लीबिया के मित्र देशों' के इस सम्मेलन का मक़सद लीबिया में बनने जा रही इस अंतरिम सरकार की विश्वसनीयता बढ़ाना और इसके नियंत्रण को मज़बूती प्रदान करना है.

ग़ौरतलब है कि गद्दाफ़ी के विरोधी लड़ाकों ने बानी वालिद और गद्दाफ़ी के गृह नगर सियर्ट में मौजूद उनके समर्थकों को आत्मसमर्पण के लिए शनिवार तक का समय दिया है.

कहाँ है गद्दाफ़ी की दौलत?

फ़रवरी में ट्यूनिशिया और मिस्र में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद लीबिया समेत अनेक लोगों ने सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरु हुए थे. लीबिया में शस्त्र विद्रोह चला और अब लीबिया के अधिकतर क्षेत्र पर उनका कब्ज़ा है.

कर्नल गद्दाफ़ी का कुछ अतापता नहीं है और उनके परिवार के कई सदस्यों ने पड़ोसी देश अलजीरिया में जाकर शरण ली है.

रूस और चीन भी शामिल

अंतरिम परिषद इस सम्मेलन के समक्ष लीबिया की ज़रूरतों और अपनी भावी योजनाओं को रखेगी.

सैफ़ ने कहा संघर्ष, सादी ने कहा बातचीत

सम्मेलन से पहले फ़्रांस ने कहा था कि उसने ज़ब्त लीबियाई संपत्ति में से दो अरब डॉलर पर से प्रतिबंध उठाने की अनुमति ले ली है.

पेरिस में मौजूद बीबीसी के रक्षा और कूटनीतिक संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है, "लीबिया में लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है,कर्नल गद्दाफ़ी का अतापता नहीं है और कई सरकारें राष्ट्रीय अंतरिम परिषद को मान्यता देने में हिचकिचा रही हैं. लेकिन लीबिया पर इस सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का संकेत है - जंग से पुनर्निर्माण की ओर..."

जोनाथन मार्कस के अनुसार, "ये लीबिया के अहम नेताओं के लिए एक मौक़ा है जब वे अपनी भावी योजनाओं और उनके लिए ज़रूरी मदद की बात कर सकते हैं. विस्थापित हुए लोगों की मानवीय समस्याएँ बहुत बड़ी हैं. सुरक्षा कायम होनी चाहिए और अर्थव्यवस्था विशेष तौर पर तेल उद्योग दोबारा शुरु होना चाहिए. राजनीतिक और संवैधानिक सुधारों के बारे में भी महत्वाकांक्षी योजना है...अब नैटो की बमबारी की योजनाओं का विरोध करने वाले चीन और रूस भी पेरिस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं."

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