'गद्दाफ़ी और सीआईए की दोस्ती के सबूत'

दस्तावेज़ इमेज कॉपीरइट Reuters

मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि उसके हाथ ऐसे दस्तावेज़ लगे हैं जो बताते हैं कि पश्चिमी ख़ुफ़िया एजेंसियां चरमपंथ से निपटने के लिए कर्नल गद्दाफ़ी की साझेदारी में काम करती थीं.

संस्था के मुताबिक़ कुछ दस्तावेज़ ऐसे भी हैं जिनसे पता चला है कि अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए ने संदिग्ध चरमपंथियों को पूछताछ के लिए लीबिया भेजा था.

हालांकि सीआईए ने इन आरोपों पर टिपण्णी करने से इनकार किया है. ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार कर्नल गद्दाफ़ी के पूर्व ख़ुफ़िया विभाग प्रमुख के दफ्तर से मिले दस्तावेज़ों से पता चलता है कि चरमपंथ के खिलाफ़ जंग के दौरान अमरीका और ब्रिटेन के ख़ुफ़िया विभागों ने लीबिया के अधिकारियों से मित्रता की थी.

ह्यूमन राइट्स वॉच के कार्यकर्ताओं को मिले इन दस्तावेज़ों को अभी न तो बीबीसी ने देखा है और न ही इनकी स्वतंत्र जांच हुई है.

ये खबरें ऐसे समय में आई हैं जबकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के विशेष सलाहकार इयान मार्टिन लीबिया की व्यवस्था बहाली में संयुक्त राष्ट्र की मदद का संदेश लेकर त्रिपोली पहुँच चुके हैं.

'अमरीकियों की रक्षा'

त्रिपोली में मौजूद संवाददाताओं और कार्यकर्ताओं को अमरीकी और ब्रितानी अधिकारियों द्वारा भेजे गए हजारों दस्तावेज़ मिले हैं.

ये दस्तावेज़ उस ऑफिस से मिले हैं जिसे कर्नल गद्दाफ़ी के पूर्व ख़ुफ़िया प्रमुख मूसा कूसा द्वारा इस्तेमाल किए जाने की संभावना प्रबल बताई गई है.

लीबिया में हुए विद्रोह के शुरूआती भाग में ही मूसा कूसा फ़रार हो गए थे और ब्रिटेन होते हुए क़तर पहुँच गए थे.

मानवाधिकार संस्थाएं एक लंबे समय से ही मूसा पर ज़्यादतियों के आरोप लगाती रहीं है और उन्होंने ब्रिटेन से उन्हें गिरफ़्तार करने की भी बात कही थी.

उधर मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने सीआईए पर अत्याचार करने के आरोप लगाए हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच के पीटर बौकार्ट ने कहा, "ये सब सिर्फ़ कथित इस्लामी चरमपंथियों को गिरफ़्तार कर उन्हें लीबिया के अधिकारियों को सौंपने तक सीमित नहीं था. सीआईए वो सवाल भी भेजती थी जिनके जवाब उन्हें चाहिए होते थे और कुछ दस्तावेज़ों बताते हैं कि कुछ की जांच के दौरान अमरीकी एजेंट मौजूद भी थे."

त्रिपोली में मौजूद बीबीसी संवाददाता केविन कॉनोली के मुताबिक़ ये दस्तावेज़ उस समय के हो सकते हैं जब लीबिया की ख़ुफ़िया प्रणाली ब्रिटेन की एमआई 6 और अमरीका की सीआईए की भरोसेमंद सहयोगी हुआ करती थी. इन दस्तावेज़ों से ये भी पता चलता है कि किस तरह ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी ने भाषण लिखने से लेकर विसम्मत लोगों के बारे में जानकारी तक कर्नल गद्दाफ़ी को मुहैया कराई थी.

संबंधित समाचार