गद्दाफ़ी के गढ़ में भारी मोर्चाबंदी

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Image caption एनटीसी के सैनिकों ने बनी वालिद को तीन तरफ़ से घेर लिया है

लीबिया की अंतरिम सरकार के समर्थक सैनिक अपदस्थ लीबियाई नेता कर्नल गद्दाफ़ी के बचे हुए ठिकानों को घेर रहे हैं.

गद्दाफ़ी विरोधी सैनिकों ने बनी वालिद को तीन तरफ़ से घेर लिया है और गद्दाफ़ी के वफ़ादारों से आत्मसमर्पण करने को कह रहे हैं.

कुछ लोगों का अनुमान है कि गद्दाफ़ी के परिवार के कुछ सदस्य बनी वालिद में हो सकते हैं. मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बनी वालिद जैसे कई स्थानों पर हिंसक टकराव अभी बाक़ी है.

लीबिया में अंतरिम प्रशासन की कमान संभाल रही नेशनल ट्रांजिशन काउंसिल यानी एनटीसी के अध्यक्ष मुस्तफ़ा अब्दुल जलील ने कहा है कि कर्नल गद्दाफ़ी का समर्थन करने वाले इलाक़ों में भी राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है लेकिन उन्हें अगले शुक्रवार तक का समय दिया गया है, अगर वे ख़ून-ख़राबा नहीं चाहते हैं तो आत्मसमर्पण कर दें.

शनिवार को ही एनटीसी समर्थक सैनिकों ने कर्नल गद्दाफ़ी के जन्मस्थान सिर्त के अलावा, जुफ़रा और सभा नाम के कबायली इलाक़ों को भी घेर लिया है. बनी वालिद राजधानी त्रिपोली से 150 किलोमीटर की दूरी पर है.

माना जा रहा है कि कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम बनी वालिद में ही अपने हथियारबंद समर्थकों के साथ मोर्चा जमा चुके हैं जहाँ से शुक्रवार को उन्होंने ऑडियो संदेश जारी करके मरते दम तक लड़ने की बात कही थी.

टकराव तय

इससे पहले गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों और एनटीसी के बीच सुलह-सफ़ाई की बात भी चल रही थी लेकिन एनटीसी समर्थक कमांडर मोहम्मद अल फा़सी की बातों से लगता है कि टकराव तय है.

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Image caption सैफ़ अल इस्लाम शायद बनी वालिद में हैं

कमांडर मोहम्मद अल फ़ासी का कहना है कि "जब एनटीसी ने समझौते के लिए समय सीमा दी तो कुछ बातचीत शुरू हुई थी, लोगों को लगा कि यह बातचीत गंभीर है और शायद बिना खून खराबे के इन इलाक़ों का नियंत्रण मिल जाए लेकिन उन्होंने समय सीमा का इस्तेमाल अपनी मोर्चाबंदी में किया है".

अभी तक ये नहीं पता है कि कर्नल गद्दाफ़ी ख़ुद कहाँ हैं, उनके प्रवक्ता मूसा इब्राहीम ने टेलीफ़ोन पर समाचार एजेंसी रायटर्स को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि वे लीबिया में हैं और अपने वफ़ादार सैनिकों के सुरक्षा घेरे में हैं.

इस बीच एनटीसी ने त्रिपोली की सुरक्षा के लिए एक विशेष काउंसिल का गठन किया है.

एनटीसी के ज्यादातर नेता अब भी बेनगाज़ी में हैं वे जल्द से जल्द त्रिपोली आना चाहते हैं लेकिन बताया जा रहा है कि ऐसा होने में अभी एक सप्ताह का समय लगेगा.

इसका मतलब ये है कि औपचारिक रूप से अंतरिम सरकार के राजधानी से कामकाज शुरू करने में अभी समय लगेगा, कुछ लोगों का मानना है कि इससे एक तरह का राजनीतिक शून्य पैदा होगा जो ठीक नहीं है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के विशेष इयन मार्टिन त्रिपोली पहुँच गए हैं जहाँ वे देश के निर्माण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की देखरेख करेंगे.

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