'सात लाख की हो सकती है मौत'

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संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि आने वाले महीनों में जैसे-जैसे सोमालिया में सूखे के हालात और गहराएँगे, कम से कम सात लाख पचास हज़ार लोगों की मौत हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक सूखे के कारण हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है. इसे 60 वर्षों में पूर्वी अफ़्रीका के सबसे भीषण सूखा माना जा रहा है.

करीब एक करोड़ 20 लाख लोगों को खाद्य सामग्री की ज़रूरत है. सोमालिया का बे इलाक़ा देश का छठा क्षेत्र है जिसे आकालग्रस्त घोषित किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ग्रेनी मोलोनी ने कीनिया में पत्रकारों को बताया है कि बे में बच्चों में कुपोषण की दर 50 फ़ीसदी है.

यूएन की ख़ाद्य सुरक्षा और पोषण विशलेषण इकाई का कहना है कि सोमालिया में 40 लाख लोग मुसीबत में है और सात लाख 50 हज़ार लोगों की अगले चार महीने में जान जा सकती है. ईकाई के मुताबिक मारे गए लोगों में से आधे बच्चे हैं.

नहीं पहुँच रही है मदद

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इथियोपिया, कीनिया और युगांडा जैसे सोमालिया के पड़ोसी देशों में भी बारिश न होने के कारण हालात ख़राब हैं.

लेकिन 20 वर्षों से चल रही लड़ाई और राष्ट्रीय सरकार के अभाव में सोमालिया की स्थिति सबसे ख़राब है.

संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले प्रशासन का मुख्यत राजधानी मोगादिशू पर नियंत्रण है.

एक चैरिटी संस्था के प्रमुख उन्नी करुणाकारा का कहना है कि चरमपंथी गुट अल शबाब ने राहतकर्मियों पर जो रोक लगाई हुई है उस कारण सोमालिया में बहुत से लोगों तक मदद नहीं पहुँचाई जा सकती.

अल शबाब का संबंध अल क़ायदा से रहा है. इसके लोगों का आरोप है कि पश्चिमी राहत संस्थाएँ राजनीतिक कारणों से स्थिति को बढ़ा-चढ़ा कर बता रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता विल रॉस के मुताबिक अगर अक्तूबर में बारिश होती भी है तो भी लोगों को खाना चाहिए होगा क्योंकि फसलें उगाने में समय लगेगा. सूखे का असर मवेशियों पर भी पड़ा है.

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