‘कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया चरमपंथियों ने’

घायलों के परिजन

दिल्ली हाई कोर्ट के पास स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में जैसे ही मैं पहुंची तो दिखाई दिए माथे पर शिकन लिए, सदमे, आंसू और कुछ गुस्से से भरे चेहरे.

जैसे जैसे खून से लथपथ घायलों को अस्पताल के आपातकाल कक्ष में ले जाया जा रहा था, वैसे वैसे सहानुभूति जताने वाले राजनेताओं की लाल बत्ती वाली गाड़ियों की कतार लंबी हो रही थी.

अस्पताल के कोने में बैठी नीलम ठाकुर अपने पति की सलामती के लिए हनुमान चालीसा का जाप करती दिखी. उनके पति बीके ठाकुर हाई कोर्ट की उस कतार का हिस्सा थे, जो बम धमाके का शिकार हुई.

हादसे के बारे में बताते हुए नीलम का गला भर आया और उन्होंने कहा, “मैंने समाचार चैनलों पर देखा कि हाई कोर्ट के पास बम धमाका हुआ है. ख़बर सुनते ही मैंने अपने पति के मोबाइल पर फ़ोन किया, लेकिन उन्होंने मेरा कॉल नहीं लिया. फिर पता चला कि उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया है. डॉक्टर का कहना है कि उनकी हालत ठीक है, लेकिन मुझे बहुत चिंता हो रही है.”

घायल हुए लोगों की ख़बर लेने पहुंचे उनके परिजनों को आपातकाल कक्ष में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी. लोगों की बढ़ती बेचैनी और मन में उठते सवालों की झलक उनके चेहरे पर साफ़ दिखाई पड़ रही थी.

मोहम्मद यासिन को ख़बर मिली कि उनके 75 वर्षीय रिश्तेदार निज़ामुद्दीन की मौत हो चुकी है, लेकिन उनका शव देखने के लिए उन्हें अंदर जाने की इजाज़त नहीं दी गई.

मोहम्मद यासिन का कहना था, “मैं अपने रिश्तेदार को देखने गया, लेकिन मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया. मैंने दूर से देखा तो सिर्फ घायलों के पैर ही नज़र आ रहे थे. कोई भी हताहत हुआ इंसान साफ़ नज़र नहीं आ रहा था.”

ग़ुस्सा

दिल्ली में रहने वाले राकेश सिन्हा को जैसे ही अपने पिता के घायल होने की ख़बर मिली, वे अस्पताल की ओर दौड़े. लेकिन अस्पताल आए तो पता चला कि उनके पिता उन्हें सुन ही नहीं पा रहे थे.

पसीने में लथपथ राकेश सिन्हा ने आक्रोशित स्वर में बताया, “मैंने डॉक्टरों से कहा कि दर्द से कराह रहे मेरे पिता को कोई दर्द का इंजेक्शन लगा दीजिए. लेकिन मेरी बात किसी ने न सुनी. अंदर मौजूद सभी डॉक्टर आपस में बतियाने में व्यस्त थे.”

राकेश का ग़ुस्सा तो अस्पताल के कर्मचारियों पर ही था. लेकिन सभी परिजनों के ग़ुस्से में एक अंश समान भी था. वो था भ्रष्टचार और राजनेताओं के खिलाफ़ उनका आक्रोश.

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Image caption अपने परिवार वालों के घायल होने की ख़बर सुन कर उनके परिजन बिलख बिलख कर रोने लगे

घायल हुए अपने भाई की हालत का जायज़ा लेने अस्पताल पहुंचे एन के चौधरी ने कहा, “ये ब्लास्ट हमारी सरकार के निकम्मेपन की पहचान है. ज़ालिमों के साथ ये सांठगांठ करती है और हमारे जैसे लोगों पर ज़ुल्म करती है.”

दूसरे शख़्स अचिंत रंजन सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “हमारे राजनेता एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने में मशगूल है और इस स्थिति का फ़ायदा आतंकवादी उठा रहे हैं. संसद से केवल कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर मौजूद हाई कोर्ट में आज धमाका हुआ है. कल चरमपंथी संसद पर भी धावा बोल सकते हैं. सरकार को कुछ कठिन सवालों के जवाब देने होंगें.”

दिल्ली शहर कई बार चरमपंथ हमलों का गवाह रहा है.बम धमाके होने के बाद थोड़े दिनों तक शहर की सुरक्षा का स्तर बढ़ा हुआ दिखाई देता है और उसके थोड़े दिनों बाद आम आदमी और सुरक्षाकर्मी हादसों को भूल जाते हैं.

हादसे की छाप को भुला पाना अगर मुश्किल होता है, तो वो सिर्फ उन लोगों के लिए जिनके लिए ये हादसे नासूर बन कर रह जाते हैं.

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