9/11 की नब्ज़ और उपन्यास

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9/11 पर कई किताबें लिखी गई हैं. लेकिन उनमें से एक किताब ऐसी है, जो उस पूरे दौर को पेश करती है जिसे उस हमले ने शुरू किया.

जब द रिलक्टैंट फंडामेंटलिस्ट नामक किताब का पाकिस्तानी हीरो चंगेज़ ट्विन टॉवर्स को ढहते हुए देखता है, तो वह मुस्कुराता है.

एक्स्ट्रीमली लाउड एंड इंक्रीडेबली क्लोज़ नामक किताब में नौ वर्षीय नन्हा ऑस्कर शेल अपने पिता की मौत के ग़म में 15 धुंधली तस्वीरों को देखता है और उसे फिर उलटकर सजाता है, तो ट्विन टॉवर से गिरता हुआ आदमी फिर से इमारत की ऊपरी मंज़िल पर सुरक्षित नज़र आता है.

अपनी किताब ओपन सिटी में लेखक तेजू कोल ने 19वीं शताब्दी के एक व्यक्ति कर्नल तासीन का ब्यौरा पेश किया है, जो लिबर्टी की मूर्ति से टकरा कर मरने वाले पक्षियों की गिनती करता है, जो एक रात में 1400 तक पहुँच जाती है. ये तस्वीर दो सदी बाद न्यूयॉर्क में ही टक्कर से हुई मौतों की याद दिलाती है.

ये तीन किताबें ऐसी हैं, जिनमें 9/11 से तथ्य निकाल कर कहानी में पिरोए गए हैं.

किताबें

अमरीका में प्रकाशित और वितरित किताबों पर नज़र रखने वाली कंपनी बॉवकर बुक्स के आँकड़ों की बुनियाद पर अभी तक ऐसी 164 किताबें सामने आई हैं, जिनमें प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से उस घटना का ज़िक्र है. या फिर इसके ईर्द-गिर्द मोहब्बत, ज़िंदगी और नुक़सान के साहित्यिक रूप से ताना-बाना बनाया गया है.

टाइम्स की साहित्य संपादक एरिका वैगनर के अनुसार ऐसे युगांतरकारी घटनाएँ परंपरागत तौर पर कल्पना के लिए बड़े कैनवस साबित हुए हैं.

वे कहती हैं, "हर किसी को हैरत है कि अगर मैं होता तो क्या होता, मैं क्या करता? और उपन्यासकार का काम यही है कि वह उस पर विचार करे." त्रासदी ने अक्सर कला के लिए अभिव्यक्ति का दरवाज़ा खोला है. स्पेनिश गृह युद्ध ने हेमिंग्वे को अपने उपन्यास फ़ॉर हुम द बेल टॉल्स के लिए प्रेरित किया. ड्रेसडेन की बमबारी ने कर्ट वॉनगट को उपन्यास स्लॉटर हाउस फ़ाइव लिखने के लिए प्रेरित किया. मानव युद्ध के इतिहास में सबसे ख़ूनी दिन, 1812 में हुई बोरोडिनो की लड़ाई ने टॉलस्टॉय की सुप्रसिद्ध रचना वार एंड पीस के लिए प्रेरणा का काम किया है.

9/11 हमले ने दुनिया को और हमारे सोचने के अंदाज़ को हिलाकर रख दिया. उपन्यासकारों के लिए इसे अपने उपन्यास में शामिल करने का औचित्य बनता है.

लेकिन क्या इन 10 वर्षों में कोई ऐसा एक उपन्यास है, जिसने हमारी कल्पना को छुआ हो, तो वही हमारे ज़माने की कहानी होगी.

तलाश जारी

Image caption 9/11 पर आधारित कई उपन्यास बाज़ार में आए हैं

ऐसा लगता है कि तलाश अब भी जारी है. एक दशक पूरा होने पर यह आकर्षक लगता है कि किसी को यह ताज दिया जाए लेकिन वैगनर के मुताबिक़ कल्पना के प्रोत्साहन की ऐसी घटनाएं किसी तारीख के साथ नहीं होतीं.

वह कहती हैं, "उपन्यास की दृष्टि से 10 साल कोई लंबा समय नहीं है. उदाहरण के तौर पर अगर आप डिकेंस के उपन्यास को देखें तो वे अपने समय के समकालीन दिखाई देते हैं. लेकिन वे अक्सर अपने बचपन के बारे में लिख रहे होते हैं जो अपनेआप में 40 साल की दूरी रखता है."

नेपोलियन के रूस पर आक्रमण के 50 साल बाद वॉर एंड पीस सामने आई थी. गिट्टीसबर्ग के युद्ध का बखान माइकल सारा के उपन्यास द किलर ऐंजल के नाम से युद्ध के 120 साल बाद सामने आई.

इसके विपरीत जौसफ़ हेलर का उपन्यास कैच-22 द्वितीय विश्व युद्ध के 15 साल बाद ही आ गया था.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में आधुनिक अंग्रेज़ी साहित्य के प्रोफेसर जॉन सदरलैंड के अनुसार उपन्यास और वर्तमान घटनाओं के बीच चोली-दामन का साथ है. लेकिन यह किसी पिंग-पांग की तरह नहीं है जिसे सीधी प्रतिक्रिया नज़र आए.

उनका कहना है कि ऐसा बहुत संभव है कि जो उपन्यास 9/11 के दौर को परिभषित करे, उसके प्लॉट का उस घटना से कोई लेना-देना ही न हो.

जनचेतना

सदरलैंड कहना है कि जब दोनों टॉवर पहले पहल गिरे थे तो सबसे ज़्यादा बिकने वाले उपन्यास में एलिस सिबोल्ड का उपन्यास लवली बोन्स सबसे ऊपर था, जिसे एक मृत बच्चे ने स्वर्ग से बयान किया था. शायद यह उस आघात को बयान करने वाली जनचेतना थी.

वे कहते हैं कि शायद इन्ही कारणों से नॉस्ट्रेडमस को प्रसिद्धी मिली, क्योंकि लोग दुनिया के अंत के बारे में सोचने लगे.

ओपन सिटी के लेखक तेजू कोल का कहना है कि उनके लिए 9/11 पर जेएम कोएटज़ी का उपन्यास एलिज़ाबेथ कॉस्टेलो है, हालांकि उसका 9/11 की घटना से कोई लेना-देना नहीं है.

वे कहते हैं, "क्या मानवीय दुख के चित्रण की कोई सीमा बांधी जा सकती है. अमरीका में हमने 9/11 के बारे में तो सुना बहुत लेकिन देखा बहुत ही कम. उस दिन जो वास्तविक मानव नुक़सान हुआ था, उससे बहुत कम और 9/11 के नतीजे में होने वाले युद्ध में हुए मानव नुक़सान से और भी कम."

उन्होंने कहा, "यह फ़ैसला कौन करेगा कि दूसरे क्या देखें. यहां तक कि सैनिकों के झंडे में लिपटे ताबूत की तस्वीरों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था."

रिलक्टैंट फ़ंडामेंटलिस्ट के लेखक मोहसिन हामिद के मुताबिक़ बहुत निश्चित उपन्यास की तलाश गुमराह कर सकती है.

उनका कहना है, "किसी भी घटना का उतना ही रूप या परिभाषा होनी चाहिए, जितने लोगों ने उसकी अनुभूति की है."

घटना

मोहम्मद हामिद का कहना है कि जब जापानी सेना ने सात दिसंबर 1941 की सुबह पर्ल हार्बर पर हमला किया तो वह महज एक घटना नहीं थी, जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका को दूसरे विश्व युद्ध में जाने पर बाध्य कर दिया.

उन्होंने कहा, "पर्ल हार्बर में कई अन्य चीजें भी शामिल थीं. ये एक चुंबन था, एक झील में तैरना था, यह मछुआरों का आश्चर्य भी था आख़िर कैसा हंगामा है, यह उड़ान लेने के पक्षियों का एक झुंड था."

वे कहते हैं कि 9/11 की गूंज साहित्य में स्वाभाविक है.

अगर हम जो चाहते हैं उसका उत्तर उतना ही आसान होता तो क्या बात थी, जल्दी में इतिहास की परिभाषा के मद्देनज़र सवाल ये उठता है कि क्या हम सही जगह पर जवाब तलाश कर रहे हैं?

मोहम्मद हामिद का कहना है कि फ़िक्शन कई चीज़ों के साथ एक लंबे मुठभेड़ नाम है. जिसे राजनेता अत्यधिक आसान बना देते हैं. फ़िक्शन उसे फिर से पेचीदा बना देता है.

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