गद्दाफ़ी विरोधी ताज़ा हमलों की तैयारी में

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लीबिया में गद्दाफ़ी विरोधी सेना बनी वलीद पर दोबारा हमला करने के लिए एकजुट हो रही है.

इससे पहले भी विद्रोही सेना ने गद्दाफ़ी के समर्थकों का गढ़ माने जाने वाले शहर बनी वलीद पर नियंत्रण करने की कोशिश की थी लेकिन वे असफल रहे थे.

शुक्रवार को विरोधी सेना को तोपखाने की गोलाबारी की वज़ह से पीछे हटना पड़ा था. इसके अलावा कर्नल गद्दाफ़ी के गृह शहर सिर्ते में भी उन्हें भारी लड़ाई का सामना करना पड़ा था.

गद्दाफ़ी के प्रवक्ता मोसा इब्राहिम का कहना है कि, "ये लड़ाई कई महीनों तक चलने वाली है."

इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को कम करने पर वोटिंग की है.

शुक्रवार को विद्रोही सेना उत्तरी इलाक़े में स्थित बनी वलीद में प्रवेश कर गई थी. ये शहर राजधानी त्रिपोली से 140 किलोमीटर दूर है.

हमला

जब वे वहाँ पहुँचे तो उन्होंने इलाक़े को खाली पाया और किसी भी परिवार का नामोनिशान नहीं था.

लेकिन जल्द ही उनका भ्रम टूटा जब किसी ने उन पर छिप कर गोली चलाई. जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते गए उन्हें मोर्टार और रॉकेटों के हमलों से जुझना पड़ा.

बीबीसी संवाददाता पीटर बाइल्स का कहना है जो लोग बनी वलीद के बाहर थे उन्होंने शहर से कई एंबुलेंस को घायलों को ले जाते देखा.

रात में कई और परिवार शहर से भाग निकले और रिपोर्टों के अनुसार अभी तक ताज़ा कार्रवाई नहीं हुई है.

एक लड़ाकू ओसामा अल फ़सी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि, "लीबिया में मौजूद ये शहर सबसे कठिन मोर्चा होगा. मुझे नहीं लगता कि आज हमें कार्रवाई करने का आदेश मिलेगा."

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वहाँ मौजूद राष्ट्रीय अंतरिम परिषद सरकार के नेतृत्व ने ये उम्मीद की थी कि वे बनी वलीद और सिर्ते पर नियंत्रण कर लेंगे और अगर वे इनमें से एक या दोनों पर कब्ज़ा कर लेते हैं इससे गद्दाफ़ी के वफ़ादारों पर प्रभाव पड़ेगा.

वोटिंग

सिर्ते में शुक्रवार को गद्दाफ़ी के विरोधी सेना पर वफ़ादारों ने ऊंची इमारतों से गोलीबारी की थी. इस लड़ाई में मशीन गनों और रॉकेटों से हमले किए गए.

बीबीसी के संवाददाता एलेस्टर लीथहेड का कहना है कि शनिवार तक विरोधी सेना आगे नहीं बढ़ेगी.

उन्होंने एयरपोर्ट पर कब्ज़ा कर लिया था लेकिन शहर की घेराबंदी जारी है.

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लीबिया की सीट ‘राष्ट्रीय अंतरिम परिषद’ को सौंप दी थी

नेशनल ट्रांज़िशनल काऊंसिल (एनसीटी) को संयुक्त राष्ट्र में सीट दिए जाने के फैसले पर हुए मतदान में 114 वोट फैसले के हक में पड़े और इसके विरोध में 17 वोट पड़े.

इसके अलावा लीबिया पर लागू कई तरह के प्रतिबंधों में ढील देने को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था

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