फ़ोन हैकिंग में गोपनीयता क़ानून का सहारा

मिली डॉलर (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट PA
Image caption मृत स्कूली छात्र मिली डॉलर के मोबाईल हैक किए जाने की ख़बर ने ब्रिटेन की राजनीति में भूचाल ला दिया था.

हाल ही में लंदन में हुए फ़ोन हैकिंग मामले की जांच कर रही पुलिस अब इस मामले में सरकार के गोपनीयता क़ानून का सहारा लेने की कोशिश कर रही है.

गोपनीयता क़ानून के तहत पुलिस अख़बारों को उनके ख़ुफ़िया सूत्रों की जानकारी देने के लिए मजबूर कर सकती है.

लंदन के 'द गार्डियन' अख़बार ने पुलिस के इस क़दम का विरोध करने का फ़ैसला किया है.

अख़बार के मुताबिक़ गोपनीयता क़ानून का इस्तेमाल सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के लिए किया जाता है.

लंदन पुलिस, 'गार्डियन' अख़बार में छपी एक रिपोर्ट के सूत्र को जानने का प्रयास कर रही है.

उस रिपोर्ट में ब्रितानी अख़बार ‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ पर एक ब्रितानी लड़की मिली डाउलर की हत्या के बाद उसका फोन हैक करने का आरोप लगाया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मिली डाउलर को नौ साल पहले वर्ष 2002 में अगवा कर लिया गया था और उस दौरान जब पुलिस मिली को ढूंढ रही थी, ‘न्यूज़ ऑफ द वर्ल्ड’ अख़बार के एक निजी जासूस ने उनका फ़ोन हैक कर लिया था.

गार्डियन के मुताबिक़ मिली का वॉयसमेल भर गया था लेकिन इस जासूस ग्लेन मलकेयर ने उनके फ़ोन से कुछ संदेश हटा दिए थे.

परिवार के एक क़रीबी सूत्र के हवाले से ‘गार्डियन’ अख़बार ने लिखा था कि मोबाईल फ़ोन से संदेश हटाए जाने के कारण परिवार के मन में झूठी उम्मीद जग गई थी कि मिली ने ही अपने संदेश हटाए हैं और वो ज़िंदा है.

लेकिन तब तक एक नाइटक्लब का चौकीदार लेवी बेलफील्ड मिली की हत्या कर चुका था.

इस रिपोर्ट ने पूरे ब्रिटेन में खलबली मचा दी थी और रूपर्ट मर्डोक ने अपने अख़बार 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' को बंद करने का फ़ैसला किया था.

लंदन के पुलिस प्रमुख समेत कई अधिकारियों को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. साथ ही अख़बार 'न्यूज़ ऑफ़ द वर्ल्ड' की उस समय संपादक रहीं रेबेका ब्रुक्स को इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाद में उन्हें गिरफ़्तार भी किया गया.

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