प्रणब, चिदंबरम पहुँचे दस जनपथ

सोनिया गाँधी इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption मंत्रिमंडल के झगड़े का मामला अब सोनिया गाँधी के पास पहुँचा.

प्रधानमंत्री कार्यालय से टू-जी घोटाले संबंधी एक दस्तावेज़ के सार्वजनिक होने के बाद मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल के दो वरिष्ठ सदस्यों- वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी और गृहमंत्री पी चिदंबरम ने काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की है.

देर शाम पहले गृहमंत्री पी चिदंबरम ने दस जनपथ पहुँचकर सोनिया गाँधी से कुछ देर तक मुलाक़ात की. उनके जाने के कुछ ही समय बाद वहाँ पहुँचे वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी जो सोमवार को ही अमरीका से लौटे हैं.

प्रणब मुखर्जी ने पहले पत्रकारों से कहा था कि अगर ज़रूरी हुआ तो वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वदेश लौटने के बाद एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अपनी बात कहेंगे.

'महत्वपूर्ण सहयोगी'

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption टू जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका पर सवालिया निशान है.

उन्होंने कहा था, "जब तक मैं चिदंबरम जी से बात नहीं कर लेता, जो कि हमारे महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, जब तक मैं पार्टी के दूसरे नेताओं से बात नहीं कर लेता और सभी दस्तावेज़ देख नहीं लेता, तब तक मैं क्या टिप्पणी करूँ?"

प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम के सोनिया गाँधी से मुलाक़ात करने के कई अर्थ लगाए जा रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी के बीच कड़वाहट की ख़बर थी क्योंकि कुछ महीने पहले मुखर्जी के दफ़्तर में सोलह जगहों पर च्युइंग-गम जैसा पदार्थ मिला था.

तब शक ज़ाहिर किया गया था कि इनके ज़रिए वित्त मंत्रालय की जासूसी की जा रही थी. इस मामले में भी पी चिदंबरम के दफ़्तर की ओर उंगली उठाई गई थी.

चिट्ठी विवाद

ताज़ा विवाद का कारण प्रणब मुखर्जी के मंत्रालय से प्रधानमंत्री के दफ़्तर को लिखी गई एक चिट्ठी है जिसमें मोबाइल कंपनियों को 2 जी लाइसेंस दिए जाने के मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे.

सूचना के अधिकार के तहत बाहर आई इस चिट्ठी के सार्वजनिक होने के बाद टू-जी कांड को अदालत तक ले जाने वाले जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने चिदंबरम की भूमिका की जाँच की माँग की थी.

तभी से ये कहा जा रहा है कि मनमोहन सिंह के दो महत्वपूर्ण मंत्रियों के बीच मनमुटाव चल रहा है. वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी का मानना है कि टू-जी घोटाले की आँच अब काँग्रेस से शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच रही है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि चिदंबरम ने इस्तीफ़े की पेशकश करके एक खेल खेला है क्योंकि उनको मालूम है कि अगर उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर किया जाता है तो फिर मामला सीधे मनमोहन सिंह तक पहुँचेगा.

'व्यर्थ विवाद'

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption प्रणब मुखर्जी ने अपने दफ़्तर की जासूसी की शिकायत की थी.

इस बीच काँग्रेस के संकटमोचक सक्रिय हो गए हैं. क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने मीडिया को सलाह दी है कि इस चिट्ठी पर वक़्त बरबाद न करें.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "व्यक्तिगत रूप से मैं महसूस करता हूँ कि उस नोट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर आप जैसे बुद्धिमान लोग अपना समय लगाएँ. देश में और बहुत सारी दिलचस्प चीज़ें हो रही हैं. उन पर ध्यान क्यों न दिया जाए?"

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मनमोहन सिंह सरकार के लिए चिंतित होना स्वाभाविक है क्योंकि टू-जी मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री ए राजा पहले ही पी चिदंबरम और मनमोहन सिंह से पूछताछ की माँग कर चुके हैं.

टू-जी घोटाले की जाँच सुप्रीम कोर्ट कर रहा है और मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होनी है और मंगलवार को ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र से लौटेंगे. यानी राजनीतिक तापमान बढ़ने के आसार हैं.

संबंधित समाचार