रूसी वित्त मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया

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Image caption कुदरिन ने खुले आम राष्ट्रपति मेदवेदेव की आर्थिक नीतियों की आलोचना की थी

रूस के वित्त मंत्री एलेक्सी कुदरिन ने इस्तीफ़ा दे दिया है. राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव नें उनका इस्तीफ़ा स्वीकार भी कर लिया है.

कुदरिन ने कहा था कि यदि मौजूदा प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव पदों की अदला-बदली करते हैं तो वो अगले साल सरकार में शामिल नही होंगे.

कुदरिन ने खुले आम राष्ट्रपति मेदवेदेव की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा था कि वह मार्च के बाद वित्त मंत्री के पद पर नहीं रहेंगे.

कुदरिन ने ये भी कहा था कि वह सैन्य ख़र्च बढ़ाने की राष्ट्रपति मेदवेदेव की योजना से सहमत नहीं हैं.

सरकार की आलोचना

इन आलोचनाओं के बाद राष्ट्रपति मेदवेदेव ने कुदरिन को आदेश दिया कि अगर वो सरकार की आर्थिक नीतियों के सहमत नहीं हैं तो तुरंत इस्तीफ़ा दें.

इसके बाद कुदरिन ने कहा कि वो प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे. इसके बाद एलेक्सी कुदरिन ने पद से इस्तीफ़ा दे दिया .

विश्लेषकों का मानना है कि वित्त मंत्री कुदरिन दिसम्बर में होने वाले संसदीय चुनावों के बाद वो प्रधानमंत्री बनना चाहते थे.

भूमिकाओं की अदला-बदली

हाल ही में यूनाईटेड रूस पार्टी के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री पुतिन और वर्तमान राष्ट्रपति मेदवेदेव ने एक दूसरे को भूमिकाएं बदलने के लिए समर्थन दिया था.

सहमति के तहत उनके पार्टी सहयोगी और वर्तमान राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव आगामी चुनाव में प्रधानमंत्री के लिए खड़े होंगे.

पुतिन ने बताया कि उन दोनों के बीच काफी साल पहले ही ये समझौता हुआ था कि कौन सा व्यक्ति कौन से पद पर होना चाहिए.

इससे पहले, पुतिन लगातार दो बार राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा करने के बाद 2008 में पद से हट गये थे, क्योंकि संविधान के प्रावधानों के तहत वो तीसरी बार राष्ट्रपति नही बन सकते थे.

मेदवेदेव ने संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति का कार्यकाल बढ़ाकर छह वर्ष और दूमा का कार्यकाल बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है.

इसका मतलब है कि पुतिन 2024 तक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल सकते हैं.

मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ की चेतावनी

सोवियत संघ के अंतिम नेता मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन मार्च में फिर से रूस के राष्ट्रपति बन जाते हैं तो देश के अगले छह साल बर्बाद हो जाएँगे.

एक अख़बार के लेख में गोर्बाच्योफ़ ने कहा कि किसी रूसी नेता को मौजूदा राजनीतिक प्रणाली बदलनी होगी न कि पुरानी टीम को बरक़रार रखते हुए सत्ता में बरक़रार रहा जाए.

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