फ़लस्तीनी आवेदन पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा शुरू

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Image caption फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने पूर्ण राष्ट्र के लिए आवेदन दिया है..

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फ़लस्तीन द्वारा औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के लिए दिए गए आवेदन पर विचार विमर्श शुरू कर दिया है.

शुक्रवार को अमरीका और इसराइल के विरोध के बावजूद फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने पूर्ण राष्ट्र के लिए आवेदन दिया था.

हालाँकि इस प्रस्ताव पर अगले कई हफ़्तों तक कोई नतीजा नही निकलेगा लेकिन बैठक से इस बात के संकेत ज़रूर मिलेंगे कि कितने देश इसका समर्थन करते हैं और कितने विरोध में है.

सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए 15 में से नौ सदस्यों का समर्थन चाहिए.लेकिन अमरीका पहले ही ये स्पष्ट कर चुका है कि वो ऐसे किसी भी प्रस्ताव को वीटो करेगा.

राजनयिकों का कहना है कि इस मुद्दे पर मतदान से पहले कई हफ़्तों का समय लगेगा.

उम्मीद है कि सुरक्षा परिषद फ़लस्तीन के इस आवेदन को एक विशेष समिति को सौपेगी जिसमें पंद्रह सदस्य होंगे.

संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीन के दूत रियाद मंसूर का कहना है कि महासभा के दो तिहाई सदस्य फ़लस्तीनी राष्ट्र के समर्थन में हैं.

उन्होने कहा, “ मुझे उम्मीद है कि सुरक्षा परिषद फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता को मंज़ूरी देकर इतिहास लिखेगी.”

अमरीकी विरोध

लेकिन अमरीका की ओर से राष्ट्रपति बराक ओबामा ने फ़लस्तीनी प्रशासन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइल के बेन्यामिन नेतन्याहू दोनों से स्पष्ट कर दिया है कि अमरीका प्रस्ताव आने की सूरत में उसे वीटो कर देगा.

बराक ओबामा ने कहा था कि फ़लस्तीनियों को एक आज़ाद देश का पूरा हक़ है, लेकिन ये सिर्फ़ बातचीत से ही हासिल किया जा सकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा था कि मध्य पूर्व में शांति का कोई शॉर्ट कट नहीं है.

दूसरी ओर फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी भी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता की फ़लस्तीन की माँग पर अमरीका ने वीटो लगाया तो मध्य पूर्व में हिंसा की एक नई लहर आ सकती है.

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