आईपॉड असामाजिक बना रहा है?

Image caption विशेषज्ञों का कहना है कि आईपॉड की लोकप्रियता से लोग एक-दूसरे से कटते जा रहे हैं

जो लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं उन्होंने कानों में सफ़ेद तारों से जुड़े आई पॉड पर संगीत सुनते लोगों को ज़रूर देखा होगा.

यहां तक कि कार में भी बच्चे हेडफ़ोन पहने अपना पसंदीदा संगीत सुन रहे होते हैं.

एक समय था जब किसी दूसरे शहर में फ़ुटबॉल मैच खेलने जा रहे खिलाड़ी बस में कार्ड खेला करते थे लेकिन आज वो जब बस से उतर रहे होते हैं तो उनके कानों में हेडफ़ोन लगा होता है. ऐसा लगता है कि पूरे सफ़र में अपने साथी खिलाड़ियों के साथ होते हुए भी वो अपनी पसंदीदा संगीत या फ़िल्मों की दुनिया में खोए रहे हैं.

आजकल कई धावक, साइकिल चलाने वाले और तैराक हेडफ़ोन लगाकर ही अभ्यास करते हैं.

स्टीरियो से आईपॉड तक

लगभग तीन दशक तक लोग निजी स्टीरियो पर संगीत सुनना लोग पसंद करते थे.

लेकिन आईपॉड ने अपने लॉन्च के थोड़े समय में ही सोनी वॉकमैन और डिस्कमैन जैसे संगीत उपकरणों को पीछे छोड़ दिया.

एप्पल ने अक्टूबर 2001 में उपभोक्ताओं की जेब में एक हज़ार गाने होने का वादा करते हुए अपना पहला आईपॉड लॉन्च किया था और पिछले दस सालों में कंपनी अब तक 30 करोड़ से ज़्यादा आईपॉड बेच चुकी है.

2005 में मीडिया में जब ये ख़बर आई थी कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश आईपॉड सुनते हैं तो लोगों ने इस ख़बर को हैरानी से लिया था.

Image caption यहां थियरी हेनरी ने अपना हेडफ़ोन इस तरह पहना है जैसे वो कह रहे हों कि ''आप मुझसे बात कर सकते हैं''

लेकिन आज परिदृश्य बदल गया है.

आईपॉड की पहुंच अब समाज में इतनी ज़्यादा हो गई है कि जॉर्ज बुश के पास आईपॉड होने को शायद ही कोई गंभीरता से लेगा.

''साउंड मूव्स : आईपॉड कल्चर एंड अर्बन एक्सपीरिएंस'' के लेखक माइकल बुल कहते हैं कि वर्ष 2007 के आते-आते पश्चिमी दुनिया के आधे से ज़्यादा शहरी या तो आईपॉड का इस्तेमाल कर रहे थे या एमपीथ्री प्लेयर का. बच्चों से लेकर दादा-दादी तक सभी आईपॉड का इस्तेमाल कर रहे थे.

प्रोफ़ेसर बुल एक शोध का हवाला देते हुए कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति एमपी-थ्री प्लेयर पर संगीत सुनता है तो पहले की तुलना में ज़्यादा देर तक संगीत सुनता रहता है.

सैन फ़्रांसिस्को स्थित कल्टोफ़मैक डॉट कॉम के संपादक लिएंडर काहनी कहते हैं, ''आईपॉड ने लोगों की ज़िदगी में सकारात्मक बदलाव लाया है. काम पर जाते हुए या समय काटने के लिए संगीत बेहतर विकल्प और क्या हो सकता है. आईपॉड दरअसल मूड ठीक करने वाली दवा की तरह है.''

लिएंडर काहनी कहते हैं कि शायद यही वजह है कि कई प्रतियोगियों द्वारा आईपॉड जैसे उत्पाद पेश करने के बावजूद बाज़ार पर इसकी पकड़ बनी हुई है और आज भी सौ में 70 से ज़्यादा आईपॉड ही बिकते हैं.

बदलाव

Image caption कई लोग ऐसी परिस्थितियों में हेडफ़ोन पहनते हैं जब वे परेशान होना नहीं चाहते

जर्मनी और ब्राज़ील के अविष्कारक एंड्रिएस पावेल ने 70 के दशक में पहले हेडफ़ोन स्टीरियो का इज़ाद किया था. उनका प्रारंभिक मक़सद घरेलू म्यूज़िक सिस्टम से लोगों को आज़ादी दिलाना था.

उन दिनों चलते हुए हेडफ़ोन पर संगीत सुनने के उनके अविष्कार पर लोग हंसते थे और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली सोनी कंपनी ने तो यहां तक कहा था कि एंड्रिएस का स्टीरियो बहुत महंगा है और इसे बाज़ार नहीं मिल सकेगा.

लेकिन आज हेडफ़ोन पर संगीत सुनने का वैश्विक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है.

आज हेडफ़ोन संस्कृति इस क़दर फैल चुकी है कि लोग इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं करना चाहते.

वर्ष 2007 में जब ब्रिटेन के कुछ नाविकों को ईरानियों ने क़ैदी बना लिया तो उनमें से एक आर्थर बैचलर आईपॉड छीने जाने पर बच्चों की तरह रो पड़े थे.

उसी साल एक मुस्लिम महिला जज को हत्या के एक मुक़दमे से इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि मुक़दमे की सुनवाई के दौरान वो हिजाब के अंदर छिपाकर आईपॉड सुन रही थीं.

लेकिन अब लोगों की आईपॉड सुनने की आदत इस क़दर बढ़ गई है कि लगता है कि लोग असामाजिक होते जा रहे हैं.

असामाजिक

टेलिग्राफ़ के स्तंभकार ब्रायनी गॉर्डन कहते हैं कि आज के युवा अपने परिवेश से जुड़ने की बजाए आईपॉड के सहारे बड़े हो रहे हैं.

गॉर्डन कहते हैं, ''मैं आईपॉड सुन रहे किसी व्यक्ति को रोककर कभी रास्ता नहीं पूछना चाहूंगा क्योंकि उनसे कुछ मालूम हो पाने की संभावना नगण्य ही है.''

प्रोफ़ेसर बुल भी आईपॉड का इस्तेमाल करने वालों के इंटरव्यू के आधार पर इसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं. आईपैड का इस्तेमाल करने वाले कई लोगों ने उनसे कहा कि वो नहीं चाहते कि उनका संगीत सुनना बंद करवाकर कोई उनसे बात करे.

Image caption कान में हेडफ़ोन लगाए लोगों को देखकर लगता है कि मानों उन्हें किसी से सरोकार ही नहीं है

कई लोग ऐसी परिस्थितियों में हेडफ़ोन लगाना पसंद करते है जब वे नहीं चाहते कि कोई उन्हें परेशान करे.

ट्रेन के सफ़र में तो आईपैड को लोग वरदान समझते हैं क्योंकि आसपास बैठे लोगों की बातचीत या ट्रेन के शोर में मोबाइल पर जो़र-ज़ोर से होनेवाली बातचीत को सुनने से आप आसानी से बच जाते हैं.

लेकिन मनोविज्ञानी ओलिवर जेम्स का कहना है कि हेडफ़ोन पहने लोग दरअसल आत्मकेंद्रीत होते हैं, उन्हें बाहर की दुनिया से कोई ख़ास मतलब नहीं होता.

स्टीरियो के अविष्कारक पावेल का कहना है कि जब उन्होंने पहला पर्सनल स्टीरियो बनाया था तो उनके दिमाग़ में ये कहीं भी नहीं था कि वो लोगों को एक-दूसरे से दूर करने की तैयारी कर रहे हैं.

बहरहाल आज पूरी दुनिया में लोग आईपॉड सुन रहे हैं. पावेल कहते हैं आज के दौर में कभी हम निजता चाहते हैं और कभी लोगों से बातचीत करना चाहते हैं.

''ये सच है कि आईपॉड लोगों को एक-दूसरे से दूर कर रहा है, लेकिन ये भी सच है कि जब हम बस में होते हैं तो कई बार किसी से बात करना नहीं चाहते. ऐसे में संगीत सुनकर समय बिताना वाक़ई अच्छा लगता है.''

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