प्रदर्शनकारियों का उपचार करने वालों को जेल

बहरीन में अदालत में सुनवाई का रेखाचित्र इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption चिकित्साकर्मियों पर विशेष सुरक्षा अदालत में मुक़दमे चले हैं

बहरीन में एक अदालत ने प्रदर्शनकारियों का इलाज करने वाले 20 चिकित्साकर्मियों को 15 साल तक की जेल की सज़ा सुनाई है.

इन लोगों को शासन के विरुद्ध लोगों को भड़काने के आरोप में सज़ा सुनाई गई.

एक अन्य मामले में विशेष सुरक्षा कोर्ट ने एक पुलिसकर्मी की हत्या के आरोप में एक प्रदर्शनकारी को मौत की सज़ा सुनाई है.

उन चिकित्साकर्मियों में से कई ने भूख हड़ताल शुरू कर दी इसलिए उन लोगों को बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

सुन्नी मुसलमानों के शासन वाले बहरीन में बहुसंख्यक शिया समुदाय के मुसलमानों के लिए अधिक अधिकारों की माँग कर रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों का उन चिकित्सकों ने इलाज किया था.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि चिकित्सकों को मिली सज़ा उनके लिए एक आश्चर्य की तरह रही.

उम्मीद भी

वैसे उन लोगों ने सतर्कतापूर्वक उम्मीद भी ज़ाहिर की कि सज़ा इस रूप में नहीं रहेगी क्योंकि जिस तरह से सरकार ने ज़मानत पर चिकित्सकों को रिहा किया उससे सरकार का रवैया थोड़ा नर्म होता दिखा है.

बहरीनी डॉक्टरों और नर्सों को पाँच से 15 वर्षों तक की जेल की सज़ा सुनाई गई. इन लोगों पर सामुदायिक घृणा भड़काने से लेकर बिना लाइसेंस के हथियार रखने का आरोप था.

ये सभी मनामा में सलमानिया मेडिकल कॉम्प्लेक्स में काम करते थे. पर्ल चौराहे से प्रदर्शनकारियों को ज़बरदस्ती हटाने के बाद 16 मार्च को सेना वहाँ घुसी थी.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लोग सिर्फ़ अपना काम कर रहे थे.

चिकित्साकर्मियों पर ये भी आरोप था कि उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों का इलाज करने से इनकार कर दिया.

चिकित्साकर्मियों के परिजनों ने जून में कहा था कि गिरफ़्तार किए गए लोगों पर अत्याचार करके उनसे ज़बरदस्ती झूठा अपराध क़बूल करवाया गया था.

फ़रवरी और मार्च के बीच देश में आम तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए थे मगर उनके विरुद्ध सरकार ने कड़ी कार्रवाई की थी और पड़ोसी देशों से भी सैनिक बुलाए थे.

बहरीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी बीएनए ने कहा कि जिस प्रदर्शनकारी अली यूसुफ़ अल-तवील को सज़ा-ए-मौत दी गई है उसने सितरा के शिया प्रभाव वाले इलाक़े में एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी.

इससे पहले अदालत दो और प्रदर्शनकारियों को भी एक पुलिसकर्मी की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा दे चुकी है.

बुधवार को अदालत ने शिया समुदाय के आठ लोगों को प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के आरोप में आजीवन कारावास की सज़ा दी थी.

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