मोदी के दिल्ली न आने का अर्थ

 शुक्रवार, 30 सितंबर, 2011 को 21:40 IST तक के समाचार
नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी दिल्ली नहीं पहुँचे लेकिन दिल्ली पहुँचना चाहते हैं.

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति को पार्टी के भीतर चल रहे द्वंद्व के तौर पर देखा जा रहा है.

नरेंद्र मोदी के अलावा हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से हटाए गए बीएस येदयुरप्पा भी कार्यकारिणी की बैठक में नहीं आए.

हालाँकि पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने मोदी की अनुपस्थिति को साधारण बात के तौर पर पेश किया, लेकिन ये सीधे सीधे केंद्रीय नेतृत्व को इलाक़ाई क्षत्रपों की चुनौती है जो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के रास्ते में कोई अड़चन नहीं आने देना चाहते.

पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने हालाँकि मोदी की नाराज़गी की बात को ख़ारिज कर दिया.

उन्होंने कहा, "ये कहना ग़लत है कि नरेंद्र मोदी नाराज़ हैं. वो नवरात्रि में उपवास रखते हैं और अहमदाबाद से बाहर नहीं जाते इसलिए वो नहीं आए हैं."

प्रसाद ने कहा कि येदयुरप्पा इसलिए नहीं आए क्योंकि उनकी पत्नी के श्राद्ध की पूजा रखी गई थी.

महत्वाकांक्षा

"ये कहना ग़लत है कि नरेंद्र मोदी नाराज़ हैं. वो नवरात्रि में उपवास रखते हैं और अहमदाबाद से बाहर नहीं जाते इसलिए वो नहीं आए हैं"

रविशंकर प्रसाद

मोदी ने कुछ ही समय पहले तीन दिन का सदभावना उपवास रखकर राष्ट्रीय राजनीति में अपने दख़ल की मंशा को उजागर कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर देश को तरक़्क़ी करनी है तो देश को गुजरात के रास्ते पर चलना पड़ेगा.

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो पूरे देश की सेवा करना चाहते हैं. उनके इन बयानों को प्रधानमंत्री पद पाने की महत्वाकांक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.

लेकिन उनकी ये महत्वाकांक्षा पार्टी में लालकृष्ण आडवाणी जैसे दूसरे महारथियों की महत्वाकांक्षा से टकरा रही है.

कई बार प्रधानमंत्री बनने का सपना देख चुके लालकृष्ण आडवाणी ने 84 वर्ष की उम्र में भी अपने तीर-तरकश रखे नहीं हैं. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वो बिहार से यात्रा शुरू करने जा रहे हैं.

पार्टी में दूसरे स्तर के नेतृत्व में भी प्रधानमंत्री पद पाने की इच्छा हमेशा बलवती रही है. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में अरुण जेतली का नाम इस सिलसिले में सबसे ऊपर है.

जेतली ने हाल ही में कहा भी था कि भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त कई लोग हैं और उनमें से सबसे बेहतर ही इस पद पर आएगा.

तैयारियाँ

अरुण जेतली और सुषमा स्वराज

बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के कई दावेदार हैं.

आम चुनाव अभी दूर है लेकिन भारतीय जनता पार्टियों के इन महारथियों की तैयारियों को देखकर लगता है कि उन्हें देश में मध्यावधि चुनाव की संभावना दिखने लगी है.

पिछले छह महीने में ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार का जो हाल हो गया है, उसे देखते हुए बीजेपी के महारथियों की तैयारी समझ में आती है. मनमोहन सिंह सरकार भ्रष्टाचार से लेकर प्रशासनिक मुद्दों तक पर दिशाहीन और लाचार नज़र आ रही है.

ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के महारथियों की तलवारों का रुख़ अपने काँग्रेसी प्रतिद्वंद्वियों की ओर ज़रूर है लेकिन एक आँख अपने ख़ेमे के दूसरे महत्वाकांक्षियों की गतिविधियों पर भी बनी हुई है.

जिस लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से यात्रा शुरू करके अपनी उग्र हिंदुत्ववादी वाली छवि तैयार की थी, वो इस बार सोमनाथ नहीं बल्कि जयप्रकाश नारायण के गाँव से यात्रा शुरू कर रहे हैं.

और वो नरेंद्र मोदी जो अपनी राजनीतिक यात्रा का अगला पड़ाव दिल्ली को बनाना चाहते हैं, पार्टी कार्यकारिणी की बैठक के लिए दिल्ली नहीं पहुँचे.

बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद इसे साधारण बात मानते हों तो मानें.

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