तालिबान से शांति वार्ता अब नहीं होगी: करज़ई

हामिद करज़ई (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption हामिद करज़ई का ये बयान दर्शाता है कि तालिबान से शांति वार्ता में सफलता नहीं मिल रही है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि उनकी सरकार अब तालिबान के साथ शांतिवार्ता नहीं करेगी. अफ़ग़ानिस्तान में धार्मिक नेताओं को संबोधित करते हुए हामिद करज़ई ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बुर्हानुद्दीन रब्बानी की हत्या ने उन्हें पाकिस्तान के साथ बातचीत पर ध्यान देने के लिए मजबूर कर दिया है.

पिछले महीने तालिबान के एक आत्मघाती हमलावर ने ख़ुद को शांति दूत बताते हुए रब्बानी से मुलाक़ात की थी और उनकी हत्या कर दी थी.

करज़ई ने कहा कि तालिबान नेता मुल्ला उमर को खोज पाना संभव नहीं है.

उनका कहना था कि तालिबान काउंसिल के बारे में भी उनके पास कोई जानकारी नहीं है.

करज़ई ने कहा, ''तालिबान काउंसिल के एक सदस्य के भेष में एक दूत आता है और हत्या (बुर्हानुद्दीन रब्बानी की) कर देता है. तालिबान ना तो इसकी पुष्टि करते हैं और ना ही इसका खंडन. इसलिए हम पाकिस्तान के अलावा किसी से बात नहीं कर सकते.''

करज़ई का कहना था, ''शांति प्रक्रिया का दूसरा पक्ष कौन है, इस सवाल का मेरे पास कोई जवाब नहीं है सिवाए ये कहने के कि हमलोगों के साथ शांति वार्ता में पाकिस्तान ही दूसरा पक्ष है.''

देश भर के धार्मिक नेताओं के काउंसिल ने बुर्हानुद्दीन रब्बानी की हत्या की घोर निंदा की और अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली के लिए उनके ज़रिए किए गए प्रयासों की तारीफ़ की.

अमरीकी आरोप

पिछले सप्ताह अमरीकी सेना ने पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर हक़्क़ानी नेटवर्क की मदद करने का आरोप लगाया था जिसे अमरीका हाल ही में काबुल स्थित अमरीकी दूतावास पर हमले करने का ज़िम्मेदार मानता है.

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर अमरीका इसी तरह से सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान पर चरमपंथियों की मदद करने का आरोप लगाता रहेगा तो वो पाकिस्तान को अपने एक सहयोगी के रूप में खो देगा.

पाकिस्तान एक ज़माने से हक़्क़ानी नेटवर्क को समर्थन देने से इनकार करता रहा लेकिन बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति रही है कि वो चरमपंथियों के सहयोग से अपनी विदेश नीति के लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है.

अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान हक़्क़ानी नेटवर्क से पूरी तरह अपने संबंध ख़त्म कर दे जिसकी जड़ें पाकिस्तानी धरती में भी मौजूद हैं.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस पर फ़ैसला कर लेंगे कि हक़्क़ानी नेटवर्क को विदेशी चरमपंथी संगठन की श्रेणी में रखा जाए या नहीं.

अमरीका के वित्त विभाग ने गुरूवार को हक़्कानी नेटवर्क से संबंध रखने के आरोप में पांच लोगों पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.

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