इतिहास के पन्नों में दो अक्तूबर

इतिहास में दो अक्तूबर की तारीख़ कई महत्वपूर्ण घटनाओं के नाम दर्ज है. आज ही के दिन भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था और रूस में कट्टरपंथी साम्यवादियों ने दंगे किए थे जिसमें कई लोग ज़ख़्मी हो गए थे.

1869: महात्मा गांधी का जन्म

Image caption मोहनदास करमचंद गांधी ने भारत की आज़ादी की लड़ाई का नेतृत्व किया था

दो अक्तूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था. उनके पिता करमचंद गांधी पोरबंदर रियासत के दीवान थे.

मोहनदास की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में हुई थी. 1988 में क़ानून की पढ़ाई के लिए वो लंदन गए. क़ानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद मोहनदास स्वदेश वापस लौटे.

थोड़े दिन तक बंबई में वकालत की और फिर एक मुक़दमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीक़ा चले गए.

वहां उन्होंने विदेशी शासन के ख़िलाफ़ भारतीयों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी.

1915 में मोहनदास भारत लौटे. दक्षिण अफ्रीक़ा के अनुभवों के आधार पर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया.

अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़ असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया और आख़िरकार 1947 में भारत को आज़ादी मिली.

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे नाम के एक दक्षिणपंथी ने दिल्ली में उनकी गोलीमार कर हत्या कर दी.

1993: कट्टरपंथी साम्यवादियों ने मॉस्को में दंगा किया

Image caption विद्रोही चाहते थे कि येल्तसिन संसद भंग करने का फ़ैसला वापस लें

दो अक्तूबर 1993 को साम्यवाद समर्थक प्रदर्शनकारियों की राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के वफ़ादार सैनिकों के साथ मॉस्को में हुई झड़प में कई लोग ज़ख़्मी हो गए थे.

प्रदर्शनकारियों ने मॉस्कों की मुख्य सड़क गार्डेन रिंग रोड पर अवरोध खड़े कर दिए थे और कारों के पहियों में आग लगा दी थी.

दंगा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया लेकिन जवाब में उन्हें करारे प्रतिरोध का सामना करना पड़ा.

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेट्रोल बम और देसी हथियारों से हमले किए.

सड़कों पर उतरे लोग दरअसल उन विद्रोही मंत्रियों का समर्थन कर रहे थे जिन्होंने रूस के संसद भवन को कब्ज़े में ले लिया था.

ये सांसद राष्ट्रपति येल्तसिन के 21 सितंबर को संसद भंग कर नए चुनाव कराने की घोषणा का विरोध कर रहे थे और चाहते थे कि राष्ट्रपति अपने फ़ैसले को वापस ले लें.

कट्टरपंथी साम्यवादियों में से प्रमुख और विद्रोही सांसदों के नेता उपराष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर रूत्सकोई ख़ुद राष्ट्रपति बनना चाहते थे और उनके आह्वान पर ही लोग सड़कों पर उतरे थे.

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में क़रीब 24 पुलिसवाले और पांच ज़ख़्मी हो गए थे. और प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पांच लोग घायल हुए थे.

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