सीरिया पर चीन, रूस के वीटो से पश्चिमी देश नाराज़

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Image caption चीन और रूस ने पश्चिमी देशों के प्रस्ताव को वीटो किया

सीरिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को रूस और चीन द्वारा वीटो किए जाने की पश्चिमी देशों ने कड़ी आलोचना की है.

फ़्रांस, ब्रिटेन और अमरीका ने इस मुद्दे पर नाराज़गी जताई है.

सीरिया में इस साल मार्च से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं और प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति बशर अल असद के इस्तीफ़े और व्यापक राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहे हैं.

वहाँ भीषण प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की तरफ़ से बल प्रयोग भी हुआ है और सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

'प्रतिबंधों की धमकी अस्वीकार्य'

फ़्रांस, जर्मनी पुर्तगाल और ब्रिटेन ने तीन बार सुरक्षा परिषद प्रस्ताव के मसौदे में बदलाव किए ताकि उसमें प्रतिबंधों का सीधे तौर पर ज़िक्र न हो और वह केवल उन विकल्पों की बात करे जिन्हें संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के तहत अंजाम दिया जा सकता है.

जहाँ रूस ने प्रतिबंधों की धमकी पर आपत्ति जताई वहीं चीन ने सीरिया के आंतरिक मामलों में दख़ल देने पर एतराज़ जताया.

संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने कहा, "आज के मसौदे के पीछे अलग ही फ़लसफ़ा था. हम दमिश्क के ख़िलाफ़ इस एकतरफ़ा दोषारोपण से सहमत नहीं हैं. सीरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की धमकी हमें स्वीकार्य नहीं है. ये समस्याओं के शांतिपूर्वक हल खोजने और उसे सीरिया में राष्ट्रीय बहस पर आधारित करने के रुख़ के ख़िलाफ़ है."

'संयुक्त राष्ट्र तानाशाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए'

उधर रूस के विदेश मंत्री एलन जूप ने कहा, "ये सीरिया और सुरक्षा परिषद के लिए दुखद दिन है. संयुक्त राष्ट्र ऐसे तानाशाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए जो अपने ही लोगों का जनसंहार कर रहा है."

ब्रिटेन का कहना था कि इस वीटो ने एक बर्बर सरकार के कारनामों पर पर्दा डाला है.

अमरीका ने भी लगभग इन्हीं शब्दों में चीन और रूस की आलोचना की और संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत सूज़न राइस तो सीरियाई प्रतिनिधि के भाषण के दौरान सभागार से उठकर बाहर चली गईं.

सूज़न राइस ने कहा, "अमरीका को बेहद अफ़सोस है कि ये परिषद इस मुद्दे से संबंधित नैतिक सवालों का समाधान करने में और क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को पैदा हुए ख़तरे का हल खोजने में असफल रही है."

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