रूस और चीन ने सीरिया पर प्रस्ताव वीटो किया

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Image caption सीरिया में मार्च से ही बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं

चीन और रूस ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के लिए सीरिया की आलोचना करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है.

यूरोपीय देशों की ओर से ये प्रस्ताव तैयार किया गया था और ये सोचते हुए उसके तेवर भी कुछ ढीले रखे गए थे कि कहीं वीटो न हो जाए. इसके तहत सीरिया पर सीधे तौर पर कोई प्रतिबंध लगाने की बात से भी बचा गया था.

मगर रूस और चीन ने कहा कि इस मसौदे में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था जो सीरिया में सैनिक हस्तक्षेप के विरुद्ध होता.

संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत ने इस वीटो पर नाराज़गी जताई है.

न्यूयॉर्क से बीबीसी संवाददाता लॉरा ट्रैवेलियन का कहना है कि ये सीरिया के मसले पर यूरोपीय देशों और अमरीका की कोशिशों को बड़ा झटका है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार मार्च से सीरिया में शुरू हुई कार्रवाई में अब तक लगभग 2700 लोग मारे गए हैं.

सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार का कहना है कि वह सुधारों को लागू करने की कोशिश कर रही है और साथ ही विपक्ष के साथ ही बात हो रही है. उसने असंतोष के लिए सशस्त्र गुटों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

दूर नहीं हुई आपत्तियाँ

सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य देशों में से नौ ने प्रस्ताव का समर्थन किया जबकि चार अन्य ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया.

मगर फ़्रांस की ओर से तैयार किया गया और ब्रिटेन, जर्मनी और पुर्तगाल के समर्थन वाला ये प्रस्ताव फिर भी गिर गया क्योंकि परिषद के पाँच में से दो स्थाई सदस्यों ने वीटो कर दिया.

इससे पहले यूरोपीय देशों ने तीन बार प्रस्ताव की भाषा में बदलाव किया था जिससे रूस और चीन की आपत्तियों को दूर किया जा सके.

रूस विदेश उपमंत्री गेनादी गातिलोव ने इससे पहले कहा था कि प्रस्ताव इसलिए अस्वीकार्य है क्योंकि वह प्रतिबंध की ओर बढ़ता है और राष्ट्रपति असद की सरकार से विपक्ष से चर्चा के लिए नहीं कहता.

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ली बाओदोंग ने कहा, "चीन ये मानता है कि मौजूदा हालात में प्रतिबंध या प्रतिबंध की धमकी सीरिया का सवाल हल करने में मदद नहीं करते. इससे तो हालात और बिगड़ेंगे ही."

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