इतिहास के पन्नों में 7 अक्तूबर

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगे कि अक्तूबर 7 ही के दिन साल 2001 में अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन और अल क़ायदा के खिलाफ़ अभियान शुरू किया था. इसी दिन साल 1958 में पाकिस्तान में पहली बार फ़ौजी शासन लगाया गया था.

2001 : तालेबान के खिलाफ़ अमरीकी अभियान शुरू

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Image caption सबसे पहले कंधार और काबुल के हवाई अड्डों के साथ साथ चरमपंथियों के प्रशिक्षण के ठिकाने पर हमले साधे गए

अमरीका ने अफ़गानिस्तान की तालेबान सरकार और उसके निकट सहयोगी संगठन अल क़ायदा के खिलाफ़ इसी दिन अफ़ग़ानिस्तान पर हवाई हमले शुरू किए थे.

ऑपरेशन एनड्युरिंग फ़्रीडम नाम के इस अभियान में सबसे पहले कंधार और काबुल के हवाई अड्डों के साथ-साथ चरमपंथियों के प्रशिक्षण के ठिकानों पर हमले साधे गए.

अभियान शुरू होने के कुछ देर बाद तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अपने देश के नाम संबोधन के दौरान कहा कि यह अमरीकी अभियान लागातार और पूरी ताकत से चलता रहेगा.

तालेबान ने इस अभियान की निंदा की और दवा किया कि उसने एक अमरीकी लड़ाकू जहाज़ मार गिराया है. अमरीका ने इस दावे का खंडन किया.

इस अभियान के तहत पहले दिन अमरीका ने अरब सागर में मौजूद अपनी पनडुब्बियों से 50 क्रूज़ मिसयालें भी दागीं.

दरअसल इस अभियान के पहले अमरीका ने तालेबान को आगाह किया था कि वो बिना शर्त तत्काल अल क़ायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को उसके हवाले कर दे. तालेबान लगातार अमरीका से इस मुद्दे पर बातचीत के लिए कहता रहा जिसके लिए अमरीका ने इंकार कर दिया.

ओसामा बिन लादेन ने अपने एक रिकॉर्डेड संदेश में इस हमले " धर्म को मानने वालों और काफ़िरों" के बीच युद्ध बताया. साल 2001 में शुरू हुआ यह युद्ध अभी भी जारी है.

1958 : पाकिस्तान में पहली बार मार्शल लॉ लगा

Image caption देश का संविधान बनने के महज़ दो साल के अंदर ही मार्शल लॉ लगा दिया गया

देश का पहले संविधान बनने के महज़ दो साल के अंदर पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा ने देश में आम चुनावों के महज़ चंद रोज़ पहले संविधान के स्थगित कर के अक्तूबर 7 ही के दिन मार्शल लॉ लगा दिया.

उनके इस कदम को देश के तत्कालीन सेनाध्यक्ष फ़ील्ड मार्शल अयूब खान का पूरा समर्थन था. मार्शल लॉ के बाद पाकिस्तान में फ़ील्ड मार्शल अयूब खान को देश मार्शल लॉ प्रशासक घोषित किया गया.

अयूब खान का मानना था कि उनका देश एक विकसित संविधान के लिए तैयार नहीं है. पर इस्कंदर मिर्ज़ा देश में फ़ौजी शासन लागू करने के बाद ज़्यादा दिन तक अपने पद पर नहीं रह पाए. देश में सैनिक शासन लागू होने के महज़ 20 दिन में फ़ील्ड मार्शल अयूब खान ने एक रक्त विहीन तख़्तापलट में इस्कंदर मिर्ज़ा को उनके पद से हटा दिया.

इस्कंदर मिर्ज़ा के लिए कठिनाइयां केवल यहीं ख़त्म नहीं हुईं. हालात इतने बिगड़ गए कि मिर्ज़ा देश छोड़ कर लंदन जा कर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा. साल 1969 में मिर्ज़ा के लंदन में ही मौत हो गई.

अयूब खान के उत्तराधिकारी और देश के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल याह्या खान ने पाकिस्तान में मिर्ज़ा को दफ़न करने की इजाज़त भी नहीं दी और मजबूरन उन्हें ईरान ले जा कर दफनाया गया.

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