शांति का नोबेल तीन महिलाओं को

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इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार तीन महिलाओं को संयुक्त रूप से दिया गया है.

इनमें से एलेन जॉनसन सरलीफ़ लाइबेरिया की राष्ट्रपति हैं जबकि लिमाह रोबेर्ता गबोवी लाइबेरिया की ही शांति अभियान कार्यकर्ता हैं.

तीसरी महिला तवाक्कुल करमान यमन की मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.

ओस्लो में नोबेल समिति ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि इन तीनों ने महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए जिस तरह से अहिंसक संघर्ष किया है, उसकी वजह से ये इस पुरस्कार की हक़दार हैं.

योगदान

माना जाता है कि लाइबेरिया में दूसरे गृहयुद्ध को ख़त्म करने के लिए जो शांति वार्ता हुई थी उसमें लिमाह गबोवी ने अहम भूमिका निभाई थी.

इसके बाद लाइबेरिया के राष्ट्रपति रहे चार्ल्स टेलर का कार्यकाल ख़त्म हो गया था और अब उन पर युद्धापराध का मुक़दमा चल रहा है.

लिमाह गबोवी वुमन पीस एंड सेक्युरिटी नेटवर्क अफ़्रीका नाम के संगठन की प्रमुख हैं. ये संगठन संघर्ष रोकने में सक्रिय महिलाओं की मदद करती है.

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Image caption तवाक्कुल करमान यमन में सरकार विरोधी आंदोलन में नारे लगाती हुईं

एलेन जॉनसन सरलीफ़ को उस वक़्त पूरी दुनिया में एक नई पहचान मिली थी जब 2005 में वे अफ़्रीका की पहली निर्वाचित राष्ट्र प्रमुख बनीं थीं.

उन्हें 14 वर्षों के गृहयुद्ध के बाद लाइबेरिया में स्थायित्व क़ायम करने का श्रेय दिया जाता है.

उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था में 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई.

ये संयोग है कि वे मंगलवार को दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव का सामना कर रही हैं. माना जा रहा है कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा से उनकी उम्मीदवारी को बल मिलेगा.

यमन में रहने वाली तवाक्कुल करमान पेशे से पत्रकार हैं और वे लोकतांत्रित परिवर्तन के लिए मानवाधिकार के लिए काम करती हैं.

इन तीनों महिलाओं को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार के रूप में एक मैडल दिया जाएगा और संयुक्त रूप से 15 लाख डॉलर (लगभग सवा सात करोड़ रुपए) की राशि दी जाएगी.

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