इतिहास के पन्नों में नौ अक्तूबर

ग्वेरा और कास्त्रो (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption ग्वेरा और कास्त्रो ने कई वर्षों तक मिलकर काम किया था.

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएंगे कि नौ अक्तूबर ही के दिन मार्क्सवादी क्रांतिकारी नेता चे ग्वेरा मारे गए थे. इसके अलावा इसी दिन जापान के सबसे लोकप्रिय खेल सूमो कुश्ती का आयोजन पहली बार जापान के बाहर ब्रिटेन में किया गया.

1967: चे ग्वेरा मारे गए

बोलीविया के जंगलों में सेना और मार्क्सवादी छापामार लड़ाके के बीच हुई लड़ाई में चे ग्वेरा मारे गए थे.

बोलीवियाई सेना के एक कमांडर कर्नल जोकिन ज़ेनटेनो अनाया ने बयान जारी कर कहा था कि बोलीविया के दक्षिण पूर्व में बसे हिग्वेरास जंगलों में 39 वर्षीय छापामार नेता मारे गए हैं.

एक समय में क्यूबा के तत्कालीन प्रधानमंत्री फ़िडेल कास्त्रो के बहुत क़रीबी रहे ग्वेरा 1965 से राजनीतिक रूप से बिल्कुल ओझल हो गए थे और उनके बारे में किसी को पता नहीं था कि वे कहां हैं.

इससे पहले भी उनके मारे जाने की ख़बरें आई थीं लेकिन कभी उनकी पुष्टि नहीं हो पाई थी.

उनके शरीर के पोस्टमार्टम से पता चला था कि वे लड़ाई के दौरान नहीं मारे गए थे बल्कि उन्हें पकड़ लिया गया था और एक दिन बाद उन्हें मार डाला गया था.

अपनी मौत के बाद ग्वेरा तीसरी दुनिया के समाजवादी क्रांतिकारी आंदोलन के हीरो बन गए और आज तक वो एक बेहद प्रशंसित रूमानी व्यक्ति की हैसियत से याद किए जाते हैं.

जून 1928 में अर्जेंटीना में पैदा होने वाले ग्वेरा फ़िडेल कास्त्रो के आंदोलन के एक अहम सदस्य थे जिन्होंने 1959 में क्यूबा की सत्ता हासिल की थी.

कास्त्रो की सरकार बनने के बाद ग्वेरा का बहुत तेजी से उत्थान हुआ और वे क्यूबा के औद्योगिक मंत्री बन गए.

लेकिन जल्द ही उनके और कास्त्रो के बीच वैचारिक मतभेद की ख़बरें सार्वजनिक होने लगीं और और आख़िरकार ग्वेरा ने अप्रैल 1965 में मंत्रीमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था.

1991: जापानी सूमो कुश्ती लंदन में

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption जापान का सबसे लोकप्रिय खेल

जापान के सबसे लोकप्रिय खेल सूमो कुश्ती का अपने 15 सौ साल पुराने इतिहास में पहली बार जापान के बाहर आयोजन किया गया.

लंदन के रॉयल अलबर्ट हॉल में आयोजित इस टूर्नामेंट का उद्घाटन नौ अक्तूबर को हुआ था.

इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर पहलवान जापान के जाने माने सूमो लीग 'मकुनौची' के सदस्य थे.

टूर्नामेंट आयोजकों का कहना था कि ये आयोजन जापान के इस जाने माने खेल को बाहरी दुनिया तक पहुंचाने का एक मौक़ा था.

जापान में होने वाला टूर्नामेंट 15 दिनों तक चलता है लेकिन लंदन में होने वाले टूर्नामेंट को सिर्फ़ पांच दिनों का कर दिया गया था.

टूर्नामेंट की तैयारी विशेष प्रकार से की गई थी और कई चिज़ो को ख़ास तौर पर जापान से मंगवाया गया था.

सबकी निगाहें सबसे ज़्यादा 238 किलों वज़न के भारी भरकम पहलवान कोनिशिकी पर थी.

भारी भरकम पहलवानो के लिए होटल में ख़ास बदलाव किए गए थे. यहां तक की कमरे,पलंग, बिस्तर, कुर्सियां, शावर और शौचालय तक को खा़स तौर पर फिट किया गया था.

संबंधित समाचार