मिस्र: 24 मौतें, पीएम ने की शांति की अपील

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Image caption मिस्र में कॉप्टिक इसाईयों और मुसलमानों के बीच तनाव का माहौल रहा है

मिस्र में कॉप्टिक इसाईयों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष में 24 लोगों की मौत के बाद प्रधानमंत्री एशाम शराफ ने शांति की अपील की है.

दोनों पक्षों के बीच हिंसा तब शुरु हुई जब ये खबर आई कि असवान प्रांत में पिछले हफ्ते एक चर्च पर हमला किया गया. कॉप्टिक इसाईयों का आरोप है कि चर्च पर हमला मुस्लिम कट्टरपंथियों ने किया था.

प्रधानमंत्री का कहना था कि मिस्र में इसाईयों और मुस्लिमों के बीच असहिष्णुता देश की सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है.

उनका बयान ऐसे समय में आया है जब कैबिनेट ने एक आपात बैठक कर के पूरे देश में रात्रिकालीन कर्फ्यू लगा दिया है.

रविवार को प्रधानमंत्री ने उन इलाक़ों का भी दौरा किया जहां संघर्ष हुए थे. इसके बाद टीवी के ज़रिए एक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, '' देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा देश की एकता के साथ छेड़छाड़ है. मिस्र में मुसलमानों और इसाईयों के बीच बढ़ती शत्रुता है.''

इससे पहले राजधानी काहिरा में अल्पसंख्यक कॉपटिक ईसाई समुदाय के लोगों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में कम से कम 24 लोग मारे गए हैं और 150 से ज़्यादा घायल हो गए हैं.

टीवी पर दिखाई तस्वीरों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने सैनिकों पर पेट्रोल बम फ़ेंके और सरकारी टेलीविज़न की इमारत के बाहर सेना के वाहन जल रहे थे.

कॉपटिक ईसाइयों का आरोप है कि शुक्रवार को असवान प्रांत में एक चर्च को नष्ट करने में कट्टरपंथ मुसलमानों का भी हाथ है. उनकी माँग है कि क्षेत्रीय गवर्नर को हटाया जाए.

कॉपटिक ईसाई मिस्र में जनसंख्या का 10 फ़ीसदी हैं. इनकी शिकायत है कि सत्ताधारी सैन्य परिषद ईसाई-विरोधी हमलावरों के प्रति सख़्त रवैया नहीं अपना रही.

मई में कॉपटिक गिरिजाघरों पर हुए हमलों में 12 लोग मारे गए थे. जबकि मार्च में मुसलमानों और कॉपटिक ईसाइयों के बीच झड़पों में तहरीर सक्वेयर पर 13 लोग मारे गए थे.

हिंसा का ताज़ा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब 28 नवंबर को मिस्र में संसदीय चुनाव होने वाले हैं.

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