इतिहास के पन्नों से - 11 अक्तूबर

इतिहास के पन्ने पलटें तो 11 अक्तूबर का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. वर्ष 1987 को स्कॉटलैंड में सोनार यंत्र की मदद से लौख़ नेस के दानव की खोज पूरी हो गई लेकिन दानव का कोई नामोनिशान नहीं मिला. वर्ष 1976 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नवीनतम अध्यक्ष, हुआ गुओफेन्ग ने, 'गैंग ऑफ फोर' की गिरफ़्तारी के आदेश दिए.

1987: नहीं मिला लौख़ नेस दानव

Image caption लौख नेस दानव की कई कथित तस्वीरें छपती रही हैं.

11 अक्तूबर 1987 को स्कॉटलैंड में सोनार यंत्र की मदद से लौख़ नेस (loch ness) के दानव की खोज पूरी हो गई लेकिन दानव का कोई नामोनिशान नहीं मिला.

क़रीब दस लाख पाउंड की मशीनों की मदद से 'ऑपरेशन डीपस्कैन' के तहत एक हफ़्ते तक लौख़ यानि झील में इस दानव को ढूंढने की कोशिश की गई.

24 जहाज़ों के ज़खीरे ने पूरे लौख़ का जायजा लिया लेकिन चर्चित दानव, नेस या नेसी का कोई पता नहीं चला.

इस दानव की कहानियां छठी सदी से सुनाई जाती रही हैं, लेकिन 1930 के दशक में इसने तूल पकड़ा.

वर्ष 1933 में जॉर्ज स्पाइसर और उनकी पत्नी ने अख़बारों को बताया कि उन्होंने 40 से 50 फीट लंबे एक दानव को लौख़ के पास की सड़क को पार करते देखा.

इसके बाद कई लोगों ने इस दानव को देखने का दावा किया. फिर 1970 के दशक में डॉ. रॉबर्ट राइन्स ने इस दानव की एक कथित तस्वीर जारी की. इसे अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित तक किया गया.

लेकिन बाद में पता चला कि ये फर्ज़ी है और कम्प्यूटर की मदद से इस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई थी.

1976: चीन का 'गैंग ऑफ फोर' गिरफ़्तार

इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption वर्ष 1975 में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष माओ ज़ेडोंग की मुत्यु हो गई थी.

11 अक्तूबर 1976 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नवीनतम अध्यक्ष, हुआ गुओफेन्ग ने, 'गैंग ऑफ फोर' की गिरफ़्तारी के आदेश दिए.

वर्ष 1975 में पार्टी के अध्यक्ष, माओ ज़ेडोंग की मृत्यु के बाद इस आदेश को चीन की राजनीति की बदलती दिशा के संकेत के तौर पर देखा गया था.

'गैंग ऑफ फोर' के नाम से जाने जाने वाले गुट में माओ की पत्नी ज़ियान क्विंग, वैंग होन्गवेन, याओ वेनयुआन और ज़ांग चुंकियाओ थे.

ये सभी दस वर्ष पहले माओ द्वारा आह्वान की गई सांस्कृतिक क्रांति के प्रचारक थे. ये एक राजनीतिक और सैद्धान्तिक प्रचार था. इसका मक़सद क्रांतिकारी भावनाएं जगाना था. और इसकी वजह से चीन में सामाजिक, राजनीतिक औऱ आर्थिक बदलाव आया था.

'गैंग ऑफ फोर' को घर में नज़रबंद रखा गया और जुलाई 1977 में कम्युनिस्ट पार्टी से बर्ख़ास्त कर दिया. वर्ष 1980 में 'गैंग ऑफ फोर' पर सरकार को अपदस्थ करने और कम्युनिस्ट तानाशाही स्थापित करने के आरोप में मुकदमा शुरु किया गया.

चारों आरोपियों को सज़ा-ए-मौत सुनाई गई. हालांकि बाद में इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया.

संबंधित समाचार