दुखदायी वर्तमान, अनिश्चित भविष्य

 मंगलवार, 11 अक्तूबर, 2011 को 13:29 IST तक के समाचार
विरोध ग्वांतानामो

ग्वानतामानो और बगराम जैसे जेलों को बंद करने के लिए अमरीका में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं.

ग्यारह सितंबर, 2001, के चरमपंथी हमलों के जवाब में अफ़गानिस्तान पर हमला करने के बाद अमरीका ने चरमपंथ से जुड़े होने की शक में सैकड़ों की संख्या में अफ़गानिस्तान और दूसरे लोगों को गिरफ़्तार कर क्यूबा के ग्वांतानामो बे और अफ़गानिस्तान में बगराम कीजेलों में डाल दिया था.

इनमें से अधिकतर पर अभी तक कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं और न ही उनको रिहा किया जा रहा है.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में अफ़गानिस्तान के अलावा पाकिस्तान, सउदी अरब और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं.

हालांकि अब मानवधिकार संस्थाएं आवाज़ उठा रही हैं कि या तो इन लोगों को अदालत में पेश किया जाए या उन्हें रिहा किया जाना चाहिए.

ख़ूफ़िया जानकारी

अमरीकी सरकार का कहना है कि इन लोगों से खुफ़िया जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है जिससे चरंपंथ से लड़ने में मदद मिल सके.

पुरानी नीति जारी

"जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सत्ता संभाली तो उन्होंने ग्वानतानामो जेल बंद करने और प्रताड़ना की नीति खत्म करने की घोषणा की थी लेकिन अब उन्होंने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन शुरू कर दिया है."

हिना शमसी, अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन

हालांकि मानवधिकार संस्थाओं का कहना है कि बिना मुक़दमा चलाए लोगों को सालों-साल तक जेल में कै़द रखना ग़ैर-कानूनी है.

अमरीकी मानवाधिकार संस्था अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन या एसीएलयू की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रॉजेक्ट की निदेशक हिना शम्सी कहती हैं, "जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सत्ता संभाली तो उन्होंने ग्वांतानामो जेल बंद करने और प्रताड़ना की नीति खत्म करने की घोषणा की थी लेकिन अब उन्होंने अपनी ही नीतियों का उल्लंघन शुरू कर दिया है. और, अब यह हालत है कि ग्वानतानामो एक ऐसी जेल बन गई है जहां से क़ैदी कभी निकल ही नहीं सकते."

शम्सी कहती हैं कि यह अमरीकी और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सरासर उल्लंघन है कि किसी को भी बग़ैर किसी आरोप के इतने वर्षों तक बंदी बना कर रखा जाए.

ग्वानतानामो में एक समय 800 बंदी थे लेकिन करीब 600 को बाद में कोई आरोप लगाए बग़ैर ही रिहा कर दिया गया था.

बहुत से कै़दियों को प्रताड़ना दिए जाने के कारण शारीरिक तौर पर गहरी चोटें भी पहुंची. कुछ ने तो कै़द के दौरान खुदकुशी भी कर ली थी.

ग्वांतानामो में कै़दियों के साथ बदसूलूकी के एक गवाह थे जेम्स यी जो एक फौजी की हैसियत से वहां मुसलिम चैपलेन की तरह दो साल तक तैनात थे.

ग्वानतानामो

ग्वानतानामों में क़ैद बहुत सारे बंदियों ने शारीरिक और मानसिक यातना के चलते ख़ुदकुशी कर ली.

जेम्स यी कहते हैं, "मैंने ख़ुद अपनी आंखों से कई कै़दियों को घसीट कर ले जाते देखा है. उनके हाथ, और उनके चेहरे पर मारपीट के निशान देखे. उनके साथ पूछताछ किए जाने के दौरान उन्हे प्रताड़ित किए जाने के बारे में भी मुझे अच्छी तरह मालूम था और उनको वह चीज़ें करने पर भी मजबूर किया जाता था जो एक मुसलमान की हैसियत से उनके लिए करना मना है. ग्वांतानामो में कु़रान की बेइज्जती भी की जाती थी."

90 क़ैदी

अब भी लगभग 90 कैदी ऐसे हैं जिनको अमरीकी सरकार ने रिहा करने का फ़ैसला तो किया है लेकिन वह अब भी किसी न किसी कारण से नहीं छूट पाए हैं.

इनमें से कुछ की उनके देश में प्रवेश पर पाबंदी है तो कुछ को उनके देश के प्रताड़ना से संबंधित कानून के चलते वहां नही भेजा जा रहा है. दूसरे देश उन्हे अपने यहां आने की इजाज़त नहीं दे रहे.

अमरीकी सरकार ने यमन और सउदी अरब के कैदियों को उनके देश वापस न भेजने का फैसला कर लिया है.

विश्व भर में ग्वांतानामो जेल में कैदियों को या तो अदालत में पेश करने या फिर रिहा करने के लिए कई वर्षों से काफ़ी दबाव बढ़ा लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ने अपने सारे दावों के बावजूद अभी तक इस ओर कोई ठोस फैसला नहीं लिया है.

बगराम

लोकिन अमरीका काबुल के पास बगराम में एक ऐसी ही जेल चला रहा है जहां सारी दुनिया से लोगों को पकड़ कर कैद किया जा रहा है.

कई अमरीकी मानवाधिकार संस्थाएं बगराम जेल का भी विरोध करती रही हैं और वहां बंद करीब दो हज़ार 400 कैदियों में से कुछ को अदालत में अपनी क़ैज के खिलाफ़ अपील करवाने की कोशिश कर रही हैं.

अमरीकी मानवाधिकार संस्था इंटरनेशनल जस्टिस नेटवर्क की निदेशक टीना फ़ॉस्टर खुद भी एक वकील की हैसियत से बगराम में बंद कई कैदियों के केस लड़ रही हैं. लेकिन उन्हे अपने मुवक्किलों से मिलने भी नहीं दिया जाता है.

टीना फोस्टर

जस्टिस नेटवर्क की टीना फोस्टर कहती हैं कि क़ैदियों को वकीलों से भी नहीं मिलने दिया जाता है.

टीना फ़ॉस्टर कहती हैं, "आज तक हमें सरकार ने यह तक नहीं बताया है कि हमारे मुवक्किल के खिलाफ़ क्या आरोप हैं. हम तो यह कोशिश कर रहे हैं कि अमरीकी सुप्रीम कोर्ट बगराम में बंद कैदियों को अदालत में उनकी कै़द के खिलाफ़ चुनौती देने की आज्ञा दे. यह इन कै़दियों की ज़िंदगियों का मामला है. उनका सारा जीवन तबाह कर दिया गया है."

टीना फ़ॉस्टर बताती हैं कि वह जिन कैदियों की वकील हैं उनको विदेशों में गिरफ़्तार कर अफ़गानिस्तान लाकर बगराम में कै़द कर दिया गया.

वह बताती हैं कि उनका एक मुवक्क्ल अमीन अल बाकरी जिन्हे बगराम में कैद रखा गया है एक व्यापारी हैं और उन्हें थाईलैंड से गिरफ़्तार किया गया था. क़ैद में छह साल बीत जाने के बाद भी उनपर कोई आरोप नहीं लगाए गए हैं.

अमरीकी मानवाधिकार संस्था एसीएलयू के मुताबिक अमरीकी अधिकारियों के नियंत्रण वाली बगराम जेल में बंद कुछ कैदियों को प्रताड़ित करने की भी ख़बरें हैं.

रामज़ी कासेम न्यू यॉर्क के विश्विद्यालय में का़नून के प्रेफ़ेसर हैं और ग्वानतानामो और बगराम के कई कैदियों के वकील भी. वह कहते हैं कि बगराम में अब वही कुछ हो रहा है जो बुश प्रशासन के दौरान ग्वानतानामो में हुआ करता था.

मानवधिकार

कौन सा जुर्म

"राष्ट्रपति ओबामा का मानना है कि बगराम के कैदियों को यह हक़ भी हासिल नहीं है कि वह अदालत में यह पूछ सकें कि उन्हे सरकार ने किस जुर्म में कैद कर रखा है. "

रामज़ी क़ासेम

रामज़ी कासेम के अनुसार, "जब ग्वानतानामो के मामले में अमरीकी सरकार को अदालतों में मुश्किलों और जनता के बढ़ते ग़ुस्से का सामना करना पड़ा तो उसने वह काम बगराम में शुरू कर दिया. अब वहां विश्व भर से लोगों को पकड़ कर लाया जा रहा है औऱ कैद किया जा रहा है. राष्ट्रपति ओबामा बगराम में वैसी ही नीति अपना रहे हैं जो जॉर्ज बुश ने ग्वांतानामो में जारी रखी थी."

"राष्ट्रपति ओबामा का मानना है कि बगराम के कैदियों को यह हक़ भी हासिल नहीं है कि वह अदालत में यह पूछ सकें कि उन्हे सरकार ने किस जुर्म में कैद कर रखा है. "

एसीएलयू ने भी बगराम के कई मामलों में अदालत में दर्ख्वास्त दी हुई है. सन 2009 की एक याचिका के जवाब में अमरीकी सरकार ने 600 कैदियों के नाम तो बताए लेकिन उनके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी.

लेकिन अब भी 2000 से अधिक ऐसे कै़दी बगराम जेल में बंद हैं जिनके बारे में अमरीकी अधिकारियों के अलावा किसी को भी कोई जानकारी नहीं है.

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