'ईरानी आतंकवादी हमले की साज़िश विफल'

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अमरीका ने कहा है कि उसने एक बड़े चरमपंथी हमले का भंडाफ़ोड किया है जिसमें ईरान से जुड़े एजेंट अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत की कथित रूप से हत्या करवाना चाहते थे.

अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा है कि ईरानी मूल के दो लोगों पर साज़िश रचने का आरोप लगाया गया है. इनमें से एक ने अमरीकी नागरिकता ले चुका है.

अटॉर्नी जनरल के मुताबिक साज़िश की योजना ईरान में क़ुद्स गुट ने बनाई जो ईरान के रेवुलूशनरी गार्ड्स का हिस्सा है.

1984 से ही ईरान को अमरीका ने आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में रखा है.

एरिक होल्डर का कहना है कि साज़िश की ‘योजना, इसका प्रायोजन और इसे दिशा निर्देश’ ईरान ने दिया है और इस कथित भूमिका के लिए ईरान का जबाव देना होगा.

आरोप

अमरीका ने उच्च ईरानी अधिकारियों को साज़िश के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.

जिन दो लोगों पर कथित रूप से साज़िश रचने का आरोप है वे हैं 56 वर्षीय मंसूर अरबाबसियार जिनके पास अमरीकी और ईरानी दोनों पासपोर्ट हैं. जबकि ईरान के ग़ुलाम शकूरी को कु़द्स फ़ोर्स का सदस्य बताया जा रहा है.

एरिक होल्डर ने पत्रकारों को बताया कि मंसूर नाम के संदिग्ध को न्यूयॉर्क में सितंबर में पकड़ा गया था जबकि ग़ुलाम शकूरी ईरान में फ़रार है.

जानकारी के मुताबिक इन दोनों लोगों को तब पकड़ा गया जब इन्होंने अमरीकी ड्रग प्रवर्तन एजेंसी के एक मुखबिर से संपर्क किया. ईरानी लोगों को लगा कि ये मुखबिर मेक्सिको के किसी गैंग का सदस्य है और इसी ग़लतफ़हमी में अमरीका में सऊदी अरब के राजदूत की हत्या की बात की.

इन लोगों पर एक विदेशी अधिकारी की हत्या की साज़िश रचने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की साज़िश का आरोप लगाया है.

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