सात माह में तीन हज़ार मौतें: संयुक्त राष्ट्र

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Image caption संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ मार्च से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों में 3000 लोग मारे गए हैं.

मानवधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीरिया में जारी झड़पों में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं.

इस बीच ब्रिटेन की सरकार ने सीरिया को चेतावनी दी है कि वो उसके शहरियों को परेशान और धमकाने की कोशिश न करे.

ब्रिटने के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि उन्होंने सीरिया के राजदूत को बुलाकर उनसे लंदन में सीरिया की दूतावास के स्टाफ़ की कथित कारगुज़ारियों पर चिंता जताई है.

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ब्रिटेन स्थित संगठन ने कहा कि 19 लोगों में से 10 तब मारे गए जब सैनिक टुकड़ियों ने उनपर उत्तरी शहर बनाश में हमला बोल दिया.

दक्षिणी शहर हारा में हथियारबंद लोगों ने कम से कम नौ सैनिकों की हत्या कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मार्च से राष्ट्रपति बशर अल-असद की हुकुमत के ख़िलाफ़ शुरू हुए विरोधों में तक़रीबन 3,000 लोगों की मौत हो गई है.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि हज़ारों शहरियों को गिरफ़्तार किया गया है.

पुष्टि

सीरिया की हुकुमत ने विदेशी मीडिया पर प्रतिबंध लगा रखा है जिसके कारण ऐसी ख़बरों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल हो गई है.

हुकुमत का कहना है कि इन हंगामों के लिए "हथियारबंद आतंकवादी" ज़िम्मेदार हैं.

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Image caption हुकुमत की दमन की नीति के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी हैं.

उनका कहना है कि सुरक्षाबलों के 1100 सदस्य इन हमलों में मारे गए हैं.

यूरोप की मदद से सीरिया के ख़िलाफ़ तैयार किए गए संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो का प्रयोग कर रोक दिया था.

प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर सीरिया विरोधियों के दमन की नीति जारी रखेगा तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

लेकिन हाल में दोनों देशों ने बशर अल-असद सरकार से आग्रह किया है कि वो सुधारों की तरफ़ तेज़ी से क़दम बढ़ाए.

संवाददाताओं का कहना है कि इसका मतलब ये हुआ कि इन देशों की हुकुमतें का सब्र भी खत्म हो रहा है.

लंदन पुलिस

लंदन पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सीरिया के राजनयिकों ने लंदन में बशर अल-असद सरकार के विरोध में आयोजित रैलियों की तस्वीरे लेकर सीरिया भेजी हैं.

लंदन में ये विरोध-प्रदर्शन सीरिया मूल के लोगों ने की थी.

ये लोग अब ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके हैं इसलिए ब्रिटेन इनपर दबाव बनाए जाने के आरोप को सख़्ती से ले रहा है.

आरोप है कि जिन लोगों की तस्वीरे सीरिया भेजी गई हैं उनके परिवारवालों और रिश्तेदारों को वहां परेशान किया जा रहा है.

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