हिलेरी ने चीन को मुद्रा, व्यापार नीतियों पर लताड़ा

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Image caption इस साल अगस्त में अमरीका का चीन के साथ व्यापार घाटा 29 अरब डॉलर हो गया

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि अब समय आ गया है कि अमरीका की विदेश नीति उसकी अर्थव्यवस्था के आसपास केंद्रित हो और वह चीन जैसे देशों को स्पष्ट बता दे वो मुद्रा नीति और आयात शुल्क का उसे नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाने देगा.

ग़ौरतलब है कि उन्होंने ये बयान इक्नॉमिक क्लब ऑफ़ न्यूयॉर्क को संबोधित करते हुए दिया है. कुछ ही दिन पहले अमरीका ने घोषणा की थी कि चीन के साथ व्यापार में अमरीका का व्यापार घाटा अगस्त में बढ़कर 29 अरब डॉलर हो गया है.

क्लिंटन ने ये भी कहा कि यदि अमरीका को दुनिया का नेतृत्व करते रहना है तो उसे भारत और ब्राज़ील जैसे देशों से सीख लेनी चाहिए क्योंकि इन देशों ने अर्थव्यवस्था को विदेश नीति का मुख्य स्तंभ बनाया है.

दूसरी ओर शुक्रवार को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने सभी देशों से अपील की थी कि वर्तमान वित्तीय संकट का सामना करने के लिए वे अपने बाज़ारों को और खोलें और संरक्षणवाद से बचें.

विश्व की दूसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुवा के अनुसार वेन जियाबाओ ने ये टिप्पणी चीन के आयात-निर्यात मेले के 110वें सत्र का उदघाटन करते हुए की थी.

प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के बीच हैं और विभिन्न देशों के बीच व्यापार और पूँजी निवेश को बढ़ावा देना ही विश्व की आर्थिक बेहतरी का हल है. विश्व व्यापार पर दोहा दौर की रुकी हुई बातचीत, व्यापार और पूँजी निवेश के मामलों में संरक्षणवाद और व्यापार संबंधी मतभेदों को राजनीतिक रंग देने से विश्व की आर्थिक स्थिति पर ख़तरे के बादल मंडरा रहे हैं."

चीन पर तीखे प्रहार

अमरीका और चीन के बीच हाल के महीनों में चीनी मुद्रा युआन के संबंध में काफ़ी तनाव रहा है.

क्लिंटन ने कहा, "वे (चीन) व्यवस्था को अपने फ़ायदे और हमारे नुक़सान के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. फ़िलहाल वे काफ़ी हद तक हम पर और हमारे बाज़ार पर निर्भर हैं. इसलिए हमारे हाथ में काफ़ी कुछ है और हम भविष्य की घटनाओं को प्रभावित कर सकते हैं. आज हमारे सहयोगी भी है जो कुछ साल पहले नहीं थे."

चेतावनी देते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा, "आज ये उचित है कि हम खड़े हों और कहें कि ये स्वीकार्य नहीं है. हमें सीमा शुल्क और मुद्रा मूल्यन नियमों के अनुसार पारस्परिक व्यवस्था के तहत चाहिए."

उन्होंने नई उभर रही अर्थव्यवस्थाओं की विशेष ज़िक्र किया और कहा, "भारत और ब्राज़ील जैसी उभर रही अर्थव्यवस्थाओं ने अर्थव्यवस्था को अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा है....उनका पहला सवाल यही होता है - इसका आर्थिक विकास पर क्या असर होगा. हमें भी यही सवाल पूछना चाहिए. ये नहीं कि विदेश नीति का हर फ़ैसला इसी पर निर्भर होगा, लेकिन ये उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए."

हिलेरी क्लिंटन ने न्यूयॉर्क में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में कहा, "उससे हमें यही सबक मिलता है कि अभी बहुत कुछ करना बाक़ी है. चाहे आप वामपंथी हों या दक्षिणपंथी, चुनौती यही है कि देश विकास कैसे करे और लोगों की आकांक्षाएँ कैसे पूरी हों."

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