दुनिया भर में 'कब्ज़ा करो' प्रदर्शन

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Image caption 'वॉल स्ट्रीट पर क़ब्ज़ा करो' मुहिम की तर्ज पर लंदन के शेयर बाज़ार के बाहर प्रदर्शन

दुनिया के कई शहरों में कॉरपोरेट जगत के कथित लोभ और सरकारी कटौतियों के विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

इटली की राजधानी रोम में पर्यटक स्थल - कोलोसियम - के पास भारी भीड़ जमा हुई है और ख़बरें हैं कि वहाँ एक बैंक पर हमला हुआ है और गाड़ियों में आग लगा दी गई है.

प्रदर्शनों का ये सिलसिला न्यूयॉर्क और मैड्रिड में जारी धरनों से प्रेरित होकर शुरु हुआ है. न्यूयॉर्क में पिछले महीने बहुत थोड़े लोगों ने वित्तीय महत्व के स्थल वॉल स्ट्रीट में - वॉल स्ट्रीट पर कब्ज़ा करो - नामक प्रदर्शन शुरू किया था.

उससे पहले मई में स्पेन की राजधानी मैड्रिड में भी शहर के मुख्य चौराहे सोल स्क्वायर पर ऐसा ही विरोध शुरू किया गया था.

न्यूयॉर्क और मैड्रिड की तर्ज़ पर 15 अक्तूबर को दुनिया भर में ऐसे प्रदर्शन करवाने वाले आयोजकों ने 82 देशों में ऐसे विरोध होने की उम्मीद जताई है.

आर्थिक मुद्दों पर दुनियाभर में प्रदर्शन

न्यूज़ीलैंड में ऑकलैंड-वेलिंगटन-क्राइस्टचर्च; ऑस्ट्रेलिया में सिडनी-मेलबोर्न; एशिया में दक्षिण कोरिया, जापान, फ़िलीपींस, हांगकांग, ताइवान; यूरोप में मैड्रिड, लंदन, एथेंस, रोम, मिलान, ,सिसली आदि शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं.

लंदन में प्रदर्शनकारी वॉल स्ट्रीट की ही तरह - लंदन शेयर बाज़ार पर कब्ज़ा करो - की तरह के प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं

उद्देश्य

सिडनी में प्रदर्शन के एक आयोजक जोश ली ने विरोध के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा,"हम केवल सरकार बदलने की बात नहीं कर रहे हैं. हममें से ज़्यादातर लोग व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं. हम चाहते हैं कि जिस तरह पैसा राजनीति पर हावी है वो बदले. बड़े-बड़े व्यापारिक संस्थान, खनन कंपनियां राजनीतिक दलों पर कब्ज़ा किए बैठी हैं. यहां ऑस्ट्रेलिया में यही सब हो रहा है.''

विरोध करनेवालों का कहना है कि वे दुनिया की 99 प्रतिशत आबादी की नुमांइदगी कर रहे हैं और वे कॉर्पोरेट और वित्तीय दुनिया के उस एक प्रतिशत हिस्से के लोभ और भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे हैं.

ताइवान में विरोध कर रही एक महिला जोइ तान ने कहा,"ताइवान में भी एक प्रतिशत वाला तबका है, यहाँ जो हैं उनमें अधिकतर 99 प्रतिशत वाले हैं, लोगों के पास काम नहीं है, 2008 की मंदी के समय छँटनी हुई थी, अव फिर वही हो रहा है, लोग त्रस्त हो चुके हैं."

लंदन में विरोध का आयोजन करनेवाले एक कार्यकर्ता स्पाइरो ने बताया कि उनका मुख्य ध्येय वित्तीय व्य्वस्था को निशाना बनाना है.

कार्यकर्ता ने कहा,"हम किसी एक नीति के विरोध में अभियान नहीं चला रहे. शुरूआती दौर में उद्देश्य इस वित्तीय व्यवस्था को लेकर जागरूकता पैदा करना है. हम मानते हैं कि सरकार और वित्तीय व्यवस्था अभी केवल कुछ बैंकों को फ़ायदा पहुँचा रही हैं और 99 प्रतिशत लोगों के हित में काम नहीं कर रहीं."

बीबीसी संवाददाता जेम्स रीड का कहना है कि हालांकि इसे मिस्र के तहरीर चौराहे जैसी क्रांति नहीं क़रार दिया जा सकता है लेकिन अमरीकी पूंजीवाद के केंद्र - वॉल स्ट्रीट पर हो रहे ये प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आर्थिक मंदी किस तरह अमरीका में बदलाव ला रही है.

प्रेक्षकों का कहना है कि स्पेन में हो रहे प्रदर्शन में माँगें स्पष्ट हैं, जैसे बेरोज़गारी से निबटने के लिए काम के घंटों में कटौती करने जैसे उपायों को लागू करने की माँग हो रही है, मगर बाकी जगहों पर हो रहे प्रदर्शनों की माँगों में अभी स्पष्टता नहीं दिखाई दे रही.

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