कई देशों में 'कॉरपोरेट लोभ' के विरुद्ध प्रदर्शन, रोम में आगज़नी

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Image caption रोम में कुछ प्रदर्शनकारियों ने रक्षा मंत्रालय के दफ़्तर, बैंकों, दुकानों पर धावा बोला

न्यूयॉर्क में 'वॉल स्ट्रीट पर कब्ज़ा करो' के नाम से कॉरपोरेट जगत के कथित लोभ, बुरे आर्थिक प्रबंधन, सरकारी ख़र्च में कटौती के ख़िलाफ़ शुरु हुए प्रदर्शन शनिवार को अमरीका, यूरोप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के प्रमुख शहरों में फैल गए.

बैनर उठाए और नारे लगाते हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए और रोम में हिंसा और आगज़नी की घटनाएँ हुई जिनमें 70 लोग घायल हो गए.

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने हिंसा को चिंताजनक संकेत बताया और कहा कि दोषियों को खोज निकाला जाएगा और उन्हें दंड मिलेगा.

शनिवार को न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान और हॉंगकॉंग से शुरु हुए प्रदर्शन बाद में रोम, मैड्रिड, लंदन, फ़्रैंकफर्ट, एथिंस, लिस्बन, वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में भी देखे गए.

अमरीका में तो हफ़्तों से प्रदर्शन चल ही रहे थे, शनिवार को दुनिया के अनेक देशों में हुए प्रदर्शनों में शामिल होने वाले अधिकतर लोग युवा वर्ग के थे.

वॉशिगंटन में हुए प्रदर्शनों में नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ता जेस्सी जैकसन शामिल हुए और उन्होंने कहा 'थोड़े के अमीर लोगों के पास बहुत अधिक है और अनेक लोगों के पास कुछ भी नहीं है.'

इटली: नकाबपोश लोगों का रक्षा मंत्रालय, पुलिस पर हमला

रोम में हज़ारों लोग विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर जमा हुए थे जब कुछ नकाबपोश लोगों ने सरकारी संपत्ति पर हमला बोल दिया.

इटली के रक्षा मंत्रालय के दफ़्तरों को आग लगा दी गई, तीन कारों को जला दिया गया, बैंको और दुकानों के शीशे तोड़े गए.

जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन नकाबपोश लोगों को रोकने की कोशिश की तो उनकी एक न सुनी गई.

जब पुलिस पर बोतलें फेंकी गई और एक पुलिस वाहन को आग लगाई गई तो पुलिस हरकत में आई और उसने आँसू गैस छोड़ी, पानी बरसाया और फिर लाठी चार्ज भी हुआ.

इटली ख़ासे बड़े सरकारी क़र्ज़ से जूझ रहा है और उस पर सरकारी ख़र्च में कटौती करने का ख़ासा दबाव है.

स्पेन: परिवारों का प्रदर्शन, राजनीतिक वर्ग से निराशा

स्पेन के मैड्रिड में हज़ारों लोग सोल स्क्वेयर की ओर बढ़े. वहाँ विरोध प्रदर्शन पाँच महीने पहले शुरु हुए थे.

शनिवार को अनेक परिवार बच्चों को साथ लिए इन प्रदर्शनों में शामिल हुए. ढोल बजाते, गाने गाते लोगों ने कई रंगों के गुब्बारे उठा रखे थे.

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Image caption शनिवार को प्रदर्शनों की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड से हुई

पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण था लेकिन जब भी सुरक्षाकर्मियों के हेलिकॉप्टर आसमान में चक्कर लगाते प्रदर्शनकारी उनके ख़िलाफ़ आवाज़े निकालते.

अनेक लोगों ने पोस्टर और बैनर उठा रखे थे लेकिन नारे पूरे राजनीतिक वर्ग के ख़िलाफ़ लग रहे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजनीतिक नेता उनका प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

स्पेन का राष्ट्रीय क़र्ज विशालकाय 1.3 खरब डॉलर है जिससे सरकारी ख़र्चे में कटौती, बढ़ती बेरोज़गारी और भविष्य के बारे में अनिश्चितता के बादल आम लोगों पर मंडरा रहे हैं.

लंदन: 'बैंकर और बड़े व्यवसायी ज़िम्मेदार हैं'

लंदन में लगभग एक हज़ार लोग सड़कों पर उतरे लेकिन पुलिस ने उन्हें स्टॉक एक्सचेंज की ओर बढ़ने से रोक दिया.

अनेक लोग अपने स्टीरियो सिस्टम साथ लाए थे. कई लोगों ने मैगाफ़ोन उठा रखे थे.

एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी से कहा, "ये मंदी केवल अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं लेकिन इस देश के लोकतंत्र के लिए भी घातक सिद्ध हो रही है. हम अब जो देख रहे हैं उससे स्पष्ट है कि लोग कह रहे हैं - बहुत हो गया."

एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, "मैं पार्ट-टाइम काम करती हूँ. मुझे रिहायश के लिए भत्ता मिलता है लेकिन मुझे विश्वविद्यालय के 23 हज़ार पाउंड चुकाने हैं. ये बैंकर और बड़े व्यवसायी इस आर्थिक संकट के लिए ज़िम्मेदार हैं और हमें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ रही है."

प्रदर्शन शांतिपूर्ण ही रहे लेकिन कुछ तनाव तब देखने को मिला जब पुलिस विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज के क़रीब जाने लगी.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे देर रात तक वहीं डटे रहेंगे.

जर्मनी, आयरलैंड में भी प्रदर्शन

जर्मनी में भी हज़ारों लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए.

तोबियास नाम के एक 27 वर्षीय स्कूल टीचर ने कहा, "मैं वैश्विक पूँजीवाद को मानवों और पृथ्वी के लिए एक टाइम बम मानता हूँ. हमारी संपन्नता का ख़र्च अन्य देशों को झेलना पड़ता है और यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक अन्यायपू्र्ण और कातिल व्यवस्था है."

आयरलैंड के डबलिन में लगभग 400 लोग मार्च करके उस होटल तक गए जहाँ यूरोपीय संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के प्रतिनिधि आयरलैंड के राहत पैकज पर चर्चा करने के लिए रुके हुए थे.

इससे पहले शनिवार सुबह ऑकलैंड, वेलिंगटन, क्राइस्टचर्च, सिडनी, मेलबर्न, जापान, फ़िलीपींस, ताइवान में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे.

पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये देखना होगा कि इन प्रदर्शनकारियों में से कोई न्ययॉर्क की तर्ज पर स्थायी तौर पर प्रदर्शनकारी शिविर स्थापित करते हैं या नहीं.

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