इसराइली अदालत की बंदियों को छोड़ने को मंज़ूरी

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Image caption इसराइली सैनिक गिलाद शालित को फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने 2006 में अग़वा कर लिया गया था.

इसराइल की सर्वोच्च अदालत ने बंदियों की अदला-बदली को मंज़ूरी देते हुए फ़लस्तीनी हमलों में मारे गए इसराइली लोगों के रिश्तेदारों की याचिका को ठुकरा दिया है.

याचिका में मृतकों के परिजनों ने एक इसराइली सैनिक गिलाद शालित के बदले सैकड़ों फ़लस्तीनी बंदियों को रिहा किए जाने का विरोध करते हुए इसे 48 घंटे आगे बढ़ाने को कहा था.

इसराइली सैनिक गिलाद शालित फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने 2006 में अग़वा कर लिया गया था.

अदालत ने समझौते के पक्ष में गिलाद शालित के माता-पिता के उन तर्कों को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने आगाह करते हुए कहा था कि कोई नही जानता कि इस देरी या फिर कार्यक्रम में तब्दीली का परिणाम क्या होगा.

अदालत में दाखिल याचिकाओं में कहा गया था कि बंदियों की सूची के नामों की समीक्षा करने के लिए और समय की ज़रूरत है.

इस बीच, प्रधानमंत्री नेतनयाहु ने इसराइली परिवारों को लिखे गए पत्र में कहा कि उन्हें मालूम है कि जिन लोगों ने उनके प्रियजनों के ख़िलाफ़ अपराध किये उन्हे छोड़ने का फैसला स्वीकार करना इतना आसान नही है.

इसराइल उन पाँच सौ लोगों के नामों की सूची भी जारी कर चुका है जिन्हें मंगलवार को छोड़ा जाना है.

वर्ष के अंत में और पाँच सौ फ़लस्तीनी बंदियों को इसराइली जेलों से रिहा किए जाने की संभावना है.

फ़लस्तीनी चरमपंथियों ने वर्ष 2006 में गज़ा पट्टी से युवा सैनिक गिलाद शालित का अपहरण कर लिया था, जब उनका अपहरण हुआ था तब वे 19 वर्ष के थे.

जिन फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा किया जा रहा है उनमें से आधे से अधिक आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे थे. इनमें से कई लोगों पर गंभीर हमलों और हिंसक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था.

इसराइल में एक टीवी चैनल के जनमत संग्रह के मुताबिक़ अधिकतर लोग शालित की रिहाई के लिए फ़लस्तीनी संगठन हमास और इसराइली सरकार के समझौते के पक्ष में हैं.

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