ड्रीमलाइनर ने भरी पहली उड़ान

Image caption ड्रीमलाइनर में ईंधन का ख़र्च 20 फ़ीसदी तक कम होता है

विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग के नए एयरक्राफ़्ट 787 ड्रीमलाइनर ने बुधवार को अपनी पहली व्यावसायिक उड़ान टोक्यो से हांगकांग के लिए भरी.

हालांकि 264 सीटों वाले ड्रीमलाइनर को ये उड़ान तीन साल पहले भरनी थी लेकिन उत्पादन में देरी की वजह से इसका कार्यक्रम आगे बढ़ता गया.

दो इंजन वाले इस विमान के उत्पादन में विलंब की वजह से इसकी लागत में अरबों डॉलर ज़्यादा ख़र्च हुए हैं लेकिन एयरक्राफ़्ट डिज़ाइन के मामले में इसे मील का पत्थर माना जा रहा है.

विमान को बनाने वाली बोइंग का कहना है कि ईंधन के मामले में ये अपनी तरह का सबसे किफ़ायती विमान है क्योंकि इसे बनाने में कार्बन फ़ाइबर और प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है.

इस विमान को पहली बार इस्तेमाल कर रही ऑल निपॉन एयरवेज़ ने विमान की छह बिजनेस क्लास सीटों की नीलामी की थी जिसमें कंपनी को 34 हज़ार डॉलर से अधिक की राशि मिली.

नीलामी से आया ये पैसा पर्यावरण संगठनों को दिया जाएगा.

कम ईंधन ख़र्च

बोइंग ने 2013 से हर महीने 13 ड्रीमलाइनर विमान के उत्पादन की योजना बनाई है.

विमान की नियमित उड़ान नवंबर महीने से शुरू की जाएगी.

बोइंग का कहना है कि विमान के निर्माण में जो सामग्री इस्तेमाल की गई है उसकी वजह से ड्रीमलाइनर अपने आकार के दूसरे विमानों की तुलना में ईंधन के मामले में 20 फ़ीसदी ज़्यादा किफ़ायती होगा.

इसका सीधा फ़ायदा ये होगा कि विमान दुनिया कई शहरों तक सीधी उड़ान भर सकेगा.

विमान के ईंधन के लिए ऊंची क़ीमत चुका रही विमान कंपनियों के प्रचालन व्यय में कमी लाने में ये ड्रीमलाइनर काफ़ी मददगार साबित हो सकता है.

विमान बनाने वाली कंपनियों में एयरबस की तुलना में जापान में बोइंग का वर्चस्व है. अब ड्रीमलाइनर की वजह से इसे और बड़ा बाज़ार हासिल हो सकता है.

आनेवाले सालों में ऑल निपॉन एयरवेज़ की दर्जनों ड्रीमलाइनर एयरक्राफ़्ट ख़रीदने की योजना है.

ड्रीमलाइनर के उत्पादन में हुई देरी से एएनए को कारोबार में काफ़ी नुक़सान हुआ है.

पिछले हफ़्ते ही चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने उत्पादन में हो रही देरी के मद्देनज़र 24 ड्रीमलाइनर विमान का ऑर्डर रद्द कर दिया है.

बोइंग का कहना है कि उसे 800 ड्रीमलाइनर विमान के ऑर्डर मिल चुके हैं.

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